Meaning of

बुज़दिल

buz-dil • بزدل

कायर; डरपोक

coward; faint-hearted

بزدل; ڈرپوک

Persian

बैठा रहता साहिल पे पर दरिया पार नहीं करता
मतलब तू भी लहरों से फिर मुझ सेा प्यार नहीं करता

तकते बैठे साहिल पे हम क़श्ती ले तूफ़ानों को
पर वो इतना बुजदिल है की हम पर वार नहीं करता

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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं
जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं

हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता
कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं

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जँचने लगा है दर्द मुझे आप का दिया
बर्बाद करने वाले ने ही आसरा दिया

कल पहली बार लड़ने की हिम्मत नहीं हुई
मुझ को किसी के प्यार ने बुजदिल बना दिया

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साथ चलना है तो तलवार उठा मेरी तरह
मुझ सेे बुज़दिल की हिमायत नहीं होने वाली

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बेवजह ही मर गया है वो किसी की याद में
बुज़दिलों को इश्क़ से कुछ दूर होना चाहिए

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कभी बुज़दिल भी लिख देंगे हाँ तेरी शान में हैवान लिख देंगे
न कर साज़िश हमारे मुल्क पर यूँँ जंग का एलान लिख देंगे

बुरी नज़रें अगर तू डाल देगा इस तिरंगे पर तो दुश्मन सुन
उठा कर अपनी हम तलवार तेरे दिल पे हिंदुस्तान लिख देंगे

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उस की सारी ज़ुल्मत को अब बातिल ही हम बोलेंगे
उस के सारे लँगूरों को बुज़दिल ही हम बोलेंगे

उस ज़ालिम की इस गंदी साज़िश से बिल्कुल मत डरना
क़ातिल को पूरी ताक़त से क़ातिल ही हम बोलेंगे

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वतन की आबरू ख़ातिर लड़ेंगे धड़ जवानों के
हमारे देश की मिट्टी कभी बुज़दिल नहीं होगी

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मिटा के नफ़रतें हर दिल से, प्यार देता मैं
नफ़स-नफ़स में मोहब्बत उतार देता मैं

मुझे किसी की मोहब्बत ने कर दिया बुज़दिल
वगरना मुल्क पे ये जान वार देता मैं

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अगर मेरा नशा था उस के सर पे तो उतर जाए
नहीं है इश्क़ उस को मुझ से तो मुँह पर मुकर जाए

मुहब्बत दिल-लगी सब काम हैं साहब दिलेरों के
मगर जो भी यहाँ बुज़दिल है सीधे अपने घर जाए

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बैठा रहता साहिल पे पर दरिया पार नहीं करता
मतलब तू भी लहरों से फिर मुझ सेा प्यार नहीं करता

तकते बैठे साहिल पे हम क़श्ती ले तूफ़ानों को
पर वो इतना बुजदिल है की हम पर वार नहीं करता

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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं
जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं

हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता
कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं

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बुज़दिल शब्द उस व्यक्ति की छवि प्रस्तुत करता है जिसका दिल साहस से रहित होता है, अक्सर ऐसे व्यक्ति का वर्णन करने के लिए उपयोग किया जाता है जो चुनौतियों या टकराव से दूर भागता है। कविता में, यह भय और बहादुरी के बीच के आंतरिक संघर्ष का प्रतीक हो सकता है, जो मानव स्थिति की कमजोरी को उजागर करता है।

कवि अक्सर 'बुज़दिल' का उपयोग भय और हिचकिचाहट के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह बहादुरी के विपरीत होता है, एक तनाव पैदा करता है जो मानव मनोविज्ञान की जटिलताओं को दर्शाता है। इसे साहस की सामाजिक अपेक्षाओं की आलोचना करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

कविता में, 'बुज़दिल' एक दर्पण के रूप में कार्य करता है जो हमारे भीतर बसे भय को दर्शाता है।