
उस की सारी ज़ुल्मत को अब बातिल ही हम बोलेंगे
उस के सारे लँगूरों को बुज़दिल ही हम बोलेंगे
उस ज़ालिम की इस गंदी साज़िश से बिल्कुल मत डरना
क़ातिल को पूरी ताक़त से क़ातिल ही हम बोलेंगे
— Danish Balliavi
Other sher from the same pen
Shers of corruption.
Voices in the same orbit
Poetry by feeling