Danish Balliavi

Danish Balliavi

@danishballiavi

Shayar Danish shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Shayar Danish's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

Ghazal

मत समझ मुस्कुराने चला हूँ अपने दिल को दुखाने चला हूँ थाम ले थाम ले जान ख़ुद को दर्द दिल का सुनाने चला हूँ तू समझ ले तरन्नुम में मेरी आह को गुनगुनाने चला हूँ इश्क़ में अश्क का है मुक़द्दर ये सदाक़त बताने चला हूँ तू ने इज़्ज़त भी नीलाम की है अपना चेहरा छुपाने चला हूँ तुझ से नफ़रत खुल-ए-आम कर के क़र्ज़ ख़ुद का चुकाने चला हूँ इश्क़ के रब्त से है तू जाहिल इश्क़ फिर भी सिखाने चला हूँ तेरा दिल तो पिघलता नहीं है बे-वजह मैं लुभाने चला हूँ मेरा मन चाहता है तुझी को अपने मन को मनाने चला हूँ तंग हो कर मुहब्बत से मुर्शद आग घर में लगाने चला हूँ मैं तो ग़ाफ़िल हूँ लज़्ज़त से इस की इस लिए ज़हर खाने चला हूँ मेरा ग़म काश हो जाए कम सो मौत को आज़माने चला हूँ ज़िंदा रहना है मुश्किल तेरे बिन अपनी हस्ती मिटाने चला हूँ इश्क़ का ज़ख़्म कब तक छुपाऊँ मैं तो सब को दिखाने चला हूँ अब ज़रा याद उस की दिला कर तुझ को 'दानिश' सताने चला हूँ — Danish Balliavi
बहुत बड़ी मैं ने की है ग़लती किसी पे यूँँ इख़्तियार कर के निचोड़ कर रख दिया है दिल को किसी ने इस दिल पे वार कर के था ख़ूब-सूरत मेरा चमन पर न अब बची है कोई भी रंगत है अब नदामत चमन को मेरे यूँँ अपने फूलों को ख़ार कर के किसी ने दिल को दुखा के मुर्शद न लौट कर के दुबारा आया बहुत ही मायूस हो चुका हूँ किसी का मैं इंतिज़ार कर के मेरी इन आँखों में आँसू दे कर न सामने आते हैं कभी भी किसी ने मोड़ा है अपना चेहरा यहाँ पे यूँँ आँखें-चार कर के लगी है दिल पर जो बेवफ़ाई कि ज़िंदगी सब उजड़ गई है गँवाया है मैं ने ख़ुद को 'दानिश' किसी से शिद्दत से प्यार कर के — Danish Balliavi

Nazm

'हमारी बे-वफ़ा हम सफ़र' बे-सबब प्यार करते हैं तुझ से हम ने ये भी जताया नहीं है कब से तू ने निकाला है दिल से तू ने अब तक बताया नहीं है अपने चेहरे से चिलमन हटा ले हम ने जी भर के देखा नहीं है प्यार होगा मुकम्मल ये कैसे साथ तू ने निभाया नहीं है हम तेरे हैं तेरे ही रहेंगे तू ने अपना ही समझा नहीं है हम तो मजनूँ हुए तेरी ख़ातिर तुझ को हम ने सताया नहीं है प्यार के तोहफ़े हम ने जो दी हैं तू ने उस को भी रक्खा नहीं है रंजिशों में ही छोड़ा है तू ने हम ने मातम मनाया नहीं है बे-वफ़ा तू है 'दानिश' के दिल में तेरे दिल में क्यूँ 'दानिश' नहीं है तेरी ख़ातिर ये जाँ भी है हाज़िर तुझ को जुमला सुनाया नहीं है — Danish Balliavi
"ख़ूब-सूरत अजनबी" मिला है सफ़र में मुझे एक चेहरा बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत ख़ुदा ने बनाया है जो उस का मुखड़ा बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत मुसलसल उसी को फ़क़त तक रहा हूँ उसी पर मैं इक नज़्म भी कह रहा हूँ वो रक्खी है जो अपने सर पर दुपट्टा बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत बहुत क़ातिलाना है उस की निगाहें बहुत जानलेवा है उस की अदाएँ लगाई है जो उस ने आँखों पे चश्मा बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत उसे हूर कह के पुकारा है मैं ने ज़रा गुफ़्तुगू कर के देखा है मैं ने उसे बात करने का जो है तरीक़ा बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत है मालूम 'दानिश' वो इक अजनबी है मगर उस में हरगिज़ न कोई कमी है जो गुज़रा है उस का मेरे साथ लम्हा बहुत ख़ूब-सूरत बहुत ख़ूब-सूरत — Danish Balliavi