आशिक़ था ऐसा मैं कि दग़ा कर नहीं सकावो बे-वफ़ा था जो कि वफ़ा कर नहीं सकाकरता था मैं उसी से मुहब्बत यूँ बे-पनाहचाहत का क़र्ज़ यार अदा कर नहीं सका— Danish Balliavi