मैं मुकम्मल न सही थोड़ा सा वाक़िफ़ हूँ बसहोता है इनका सनम जिस्म पे मरने वालाहुस्न वालों को न पचती है मुहब्बत 'दानिश'चाहिए इनको दग़ा इश्क़ में करने वाला— Danish Balliavi