अपने हाथों पे वो मेहँदी को रचाती होगीजान सज कर के वहाँ मन को लुभाती होगीइस जहाँ के कोई गुमनाम इलाक़े में दोस्तमेरी अम्मी की बहू ईद मनाती होगी— Danish Balliavi