मजबूरियों के साथ फ़क़त खेलता रहाऔर खींचता रहा मुझे जज़्बात की तरफ़वो शख़्स मेरे हाल पे रोया नहीं कभीदिल को दुखा के चल पड़ा गुजरात की तरफ़— Danish Balliavi