Meaning of

ज़ुल्मत

zulmat • کرنےوالے

अंधकार; उदासी

darkness; gloom

تاریکی; اداسی

Arabic

लाख कहते रहें ज़ुल्मत को न ज़ुल्मत लिखना हम ने सीखा नहीं प्यारे ब-इजाज़त लिखना — Habib Jalib
एक ही नाथ हैं जगत में वो प्रभु जगन्नाथ एक हैं अपने — Vinod Ganeshpure
जग उठा हूँ रह-ए-ज़िंदा में सो जलना पड़े है मैं वगरना वो दिया हूँ जिसे ज़ुल्मत है पसंद — Chetan Verma
ज़ुल्मत-परस्त कहो मुझे क्यूँँ मैं ने तो बच्चों के होंठों पर हैं मुस्कान भरे — Akhilesh Anand
शब-ए-ज़ुल्मत भी हो जाए पशेमाँ दिया ऐसा जलाना चाहता हूँ — Waseem Siddharthnagari
ख़्वाबों को देखने से मिला कुछ नहीं मुझे लेकिन शब-ए-ज़ुल्मत से गिला कुछ नहीं मुझे — Ravi 'VEER'
जब से ज़ुल्मत को बयान-ए-हुस्न तेरा दे दिया उन दिनों से मेरे आज़ू-बाज़ू साए बैठे हैं — Milan Gautam

'ज़ुल्मत' शब्द गहरे अंधकार का आभास कराता है, चाहे वह भौतिक हो या रूपक। कविता में, यह अक्सर निराशा की गहराई या अज्ञात का प्रतीक होता है, जहाँ स्पष्टता धुंधली होती है और भावनाएँ रहस्य में लिपटी होती हैं।

कवि अक्सर 'ज़ुल्मत' का उपयोग आंतरिक उथल-पुथल और अस्तित्वगत भय की थीम को खोजने के लिए करते हैं। यह प्रकाश के विपरीत होता है, जो आशा या प्रकाशन के उदय के लिए पृष्ठभूमि के रूप में कार्य करता है।

'ज़ुल्मत' की गोद में, आत्मा की मौन फुसफुसाहटें मिलती हैं, जो प्रकाश की ओर यात्रा करने का आग्रह करती हैं।