Meaning of

क़ातिल

qaateel • قاتل

हत्यारा; संहारक; जल्लाद; रूपक में, दिल तोड़ने वाला

killer; slayer; executioner; metaphorically, a heartbreaker

قاتل; سفاک; جلاد; استعارہ میں، دل شکن

Arabic

नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा
परिंदे फिर वही होंगे शिकारी जाल बदलेगा

वही हाकिम वही ग़ुर्बत वही क़ातिल वही ग़ासिब
बताओ कितने सालों में हमारा हाल बदलेगा

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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

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सोचिए सौ सौ दफ़ा रिश्ता मिरा उस सेे
मर गया है मारकर मुझ को मिरा क़ातिल

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मेरा क़ातिल ही मेरा मुंसिफ़ है
क्या मिरे हक़ में फ़ैसला देगा

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नौ नए लड़कों को अब तक खा गई नौ-नौ दफ़ा
ये तुम्हारे शहर में क़ातिल हवा या हूर है

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यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का
सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता

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चुरायगा उसी से आँख क़ातिल
ज़रा सी जान जिस बिस्मिल में होगी

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हमीं को क़ातिल कहेगी दुनिया हमारा ही क़त्ल-ए-आम होगा
हमीं कुएँ खोदते फिरेंगे हमीं पे पानी हराम होगा

अगर यही ज़ेहनियत रही तो मुझे ये डर है कि इस सदी में
न कोई अब्दुल हमीद होगा न कोई अब्दुल कलाम होगा

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पूरी काइ‌नात में एक क़ातिल बीमारी की हवा हो गई
वक़्त ने कैसा सितम ढाया कि दूरियाँ ही दवा हो गईं

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सब ने माना मरने वाला दहशत-गर्द और क़ातिल था
माँ ने फिर भी क़ब्र पे उस की राज-दुलारा लिक्खा था

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नतीजा फिर वही होगा सुना है साल बदलेगा
परिंदे फिर वही होंगे शिकारी जाल बदलेगा

वही हाकिम वही ग़ुर्बत वही क़ातिल वही ग़ासिब
बताओ कितने सालों में हमारा हाल बदलेगा

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हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है
इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है

ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी
इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी

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मूल रूप में, 'क़ातिल' का अर्थ है वह जो जीवन लेता है, भय और अंतिमता का प्रतीक। कविता में, यह अक्सर एक रूपक बन जाता है, जो दिल को मोह लेता है और तोड़ देता है, एक प्रेमी जिसकी उपस्थिति उतनी ही घातक है जितनी मोहक।

'क़ातिल' का उपयोग कवि अक्सर एक प्रिय के लिए करते हैं, जिसकी सुंदरता या उदासीनता गहराई से चोट पहुँचाती है। यह प्रेम की मिठास और उसके हानि पहुँचाने की क्षमता के विरोधाभास को उजागर करता है।

कविता में, 'क़ातिल' प्रेम की द्वैत प्रकृति को दर्शाता है - इसकी मोहकता और विनाश की क्षमता।