Meaning of

बुज़्दिल

buzdil • بزدل

कायर; साहस की कमी

coward; lacking courage

بزدل; ہمت کی کمی

Persian

दरयाफ़्त अपने मुश्किलों की तुम करो
यूँँ बात अपनी मंज़िलों की तुम करो

इक बात ये मुझ को बताओ तुम ज़रा
क्यूँँ बात फिर अब बुज़दिलों की तुम करो

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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं
जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं

हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता
कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं

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साथ चलना है तो तलवार उठा मेरी तरह
मुझ सेे बुज़दिल की हिमायत नहीं होने वाली

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बेवजह ही मर गया है वो किसी की याद में
बुज़दिलों को इश्क़ से कुछ दूर होना चाहिए

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कभी बुज़दिल भी लिख देंगे हाँ तेरी शान में हैवान लिख देंगे
न कर साज़िश हमारे मुल्क पर यूँँ जंग का एलान लिख देंगे

बुरी नज़रें अगर तू डाल देगा इस तिरंगे पर तो दुश्मन सुन
उठा कर अपनी हम तलवार तेरे दिल पे हिंदुस्तान लिख देंगे

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उस की सारी ज़ुल्मत को अब बातिल ही हम बोलेंगे
उस के सारे लँगूरों को बुज़दिल ही हम बोलेंगे

उस ज़ालिम की इस गंदी साज़िश से बिल्कुल मत डरना
क़ातिल को पूरी ताक़त से क़ातिल ही हम बोलेंगे

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वतन की आबरू ख़ातिर लड़ेंगे धड़ जवानों के
हमारे देश की मिट्टी कभी बुज़दिल नहीं होगी

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मिटा के नफ़रतें हर दिल से, प्यार देता मैं
नफ़स-नफ़स में मोहब्बत उतार देता मैं

मुझे किसी की मोहब्बत ने कर दिया बुज़दिल
वगरना मुल्क पे ये जान वार देता मैं

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अगर मेरा नशा था उस के सर पे तो उतर जाए
नहीं है इश्क़ उस को मुझ से तो मुँह पर मुकर जाए

मुहब्बत दिल-लगी सब काम हैं साहब दिलेरों के
मगर जो भी यहाँ बुज़दिल है सीधे अपने घर जाए

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ख़ुद-कुशी माना नहीं है बुज़दिली पर
ख़ुद-कुशी तो मसअले का हल नहीं है

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दरयाफ़्त अपने मुश्किलों की तुम करो
यूँँ बात अपनी मंज़िलों की तुम करो

इक बात ये मुझ को बताओ तुम ज़रा
क्यूँँ बात फिर अब बुज़दिलों की तुम करो

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सितारे और क़िस्मत देख कर घर से निकलते हैं
जो बुज़दिल हैं मुहूरत देख कर घर से निकलते हैं

हमें लेकिन सफ़र की मुश्किलों से डर नहीं लगता
कि हम बच्चों की सूरत देख कर घर से निकलते हैं

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'बुज़्दिल' शब्द में डर और भय की भावना समाहित है। कविता में यह अक्सर वीरता के विपरीत होता है, दिल के आंतरिक संघर्षों को उजागर करता है। यह शब्द निराशा का भार लिए होता है, क्योंकि यह चुनौतियों का सामना करने में असफलता को दर्शाता है।

कवि 'बुज़्दिल' का उपयोग आंतरिक संघर्ष और मानव स्थिति के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह आत्मा की हिचकिचाहट और भय का दर्पण बनता है। अक्सर साहस के साथ विपरीत होता है, यह व्यक्तिगत संघर्षों की कथा को गहराई देता है।

कविता के क्षेत्र में, 'बुज़्दिल' मानव आत्मा की कमजोरियों पर एक मार्मिक प्रतिबिंब बन जाता है।