Meaning of
चश्म-ए-मस्त-ए-पीर-ए-मय-ख़ाना
chashm-e-mast-e-peer-e-may-khaana • چشم مست پیر مے خانہ
Hindi
मयख़ाने के पीर की मस्त नज़र
English
intoxicated gaze of the elder of the tavern
Urdu
مے خانہ کے پیر کی مست نظر
Origin
Persian
Nuance
चश्म-ए-मस्त-ए-पीर-ए-मय-ख़ाना एक बुद्धिमान बुजुर्ग की छवि को उभारता है, जो जीवन के रहस्यों में गहराई से डूबा हुआ है, जिसकी नज़र मस्त और ज्ञानवर्धक दोनों है। यह ज्ञान और भोग का मिश्रण सुझाता है, जहाँ मयख़ाना जीवन के गहरे सत्य का रूपक बन जाता है।
Poetic Usage
कवि अक्सर चश्म-ए-मस्त-ए-पीर-ए-मय-ख़ाना का उपयोग भोग के माध्यम से प्राप्त ज्ञान के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह युवावस्था की मासूमियत को उम्र की अनुभवी अंतर्दृष्टि के विपरीत करता है, अक्सर जीवन के विरोधाभासों में पाई जाने वाली सुंदरता को उजागर करता है।
Closing Insight
चश्म-ए-मस्त-ए-पीर-ए-मय-ख़ाना ज्ञान और भोग के विरोधाभास को पकड़ता है, एक द्वैत जो काव्यात्मक अभिव्यक्ति को समृद्ध करता है।