Meaning of

दक़

daq • دق

चिढ़; खीज

annoyance; irritation

جھنجھلاہٹ; چڑچڑاہٹ

Arabic

जिस को जाना है वो जा सकता है
कोई दिक्कत वाली बात नहीं है

19

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ
मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ

ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो
वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

523

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बस ये दिक़्क़त है भुलाने में उसे
उस के बदले में किस को याद करें

127

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मन में एक इरादा होता है ताबिश
राजा पहले प्यादा होता है ताबिश

मानता हूँ मजबूरियाँ थीं कुछ दिक्कत थी
पर वा'दा तो वा'दा होता है ताबिश

75

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अहमियत अब तेरी कॉलर के बटन जितनी है
न हो तो भी कोई दिक़्क़त नहीं हो भी तो भी

63

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गुलाब चाँदनी-रातों पे वार आए हम
तुम्हारे होंटों का सदक़ा उतार आए हम

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तुम को हिचकी लेने से भी दिक़्क़त थी
मैं ने तुम को याद ही करना छोड़ दिया

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उँगली पकड़ाओ इनको तो, हाथ मिलाने लगते हैं
एक ग़ज़ल सुन लो तो ज़ालिम चार सुनाने लगते हैं

इस जीवन में थोड़ी दिक़्क़त अच्छी होती है यारो
ख़ाली सड़कों पर हम गाड़ी तेज़ चलाने लगते हैं

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जिन के किरदार से आती हो सदाक़त की महक
उन की तदरीस से पत्थर भी पिघल सकते हैं

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तसद्दुक़ इस करम के मैं कभी तन्हा नहीं रहता
कि जिस दिन तुम नहीं आते तुम्हारी याद आती है

28

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जिस को जाना है वो जा सकता है
कोई दिक्कत वाली बात नहीं है

19

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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ
मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ

ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो
वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ

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'दक़' शब्द उन छोटी-छोटी झुंझलाहटों का सार प्रस्तुत करता है जो शांति को भंग कर सकती हैं। कविता में, यह अक्सर उन छोटी लेकिन लगातार परेशानियों का प्रतीक होता है जो मन पर बोझ डालती हैं।

कवि 'दक़' का उपयोग आंतरिक अशांति और जीवन की छोटी-छोटी परेशानियों के बीच संयम बनाए रखने के संघर्ष के विषय को खोजने के लिए करते हैं।

काव्यिक क्षेत्र में, 'दक़' शांति और अशांति के बीच नाजुक संतुलन की याद दिलाता है।