Meaning of

दर–ओ–दीवार

dar-o-deewaar • در و دیوار

दरवाज़े और दीवारें; घर की संरचना; घर का प्रतीक

doors and walls; the structure of a house; metaphor for home

دروازے اور دیواریں; گھر کی ساخت; گھر کی علامت

Persian

दिख न जाए उसे मिरी हालत
दर-ओ-दीवार पाट लेता हूँ

वक़्त कटता नहीं मिरा जिस दिन
हाथ की नस ही काट लेता हूँ

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दर-ओ-दीवार पे हसरत से नज़र करते हैं
ख़ुश रहो अहल-ए-वतन हम तो सफ़र करते हैं

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दर-ओ-दीवार से रौशन नहीं होता मकाँ कोई
जहाँ ख़ुशियाँ नहीं होती वो घर भी घर नहीं होता

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फ़ितरत अगर हो काँच सी, दर-ओ-दीवार की
परदे हवा से कब तलक इज़्ज़त बचाएँगे

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दर-ओ-दीवार थाम लेते हैं
लोग जब तेरा नाम लेते हैं

पहले आँखें तिरी मुयस्सर थीं
अब नहीं हैं सो जाम लेते हैं

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महबूब को नज़रों के दरीचे में बिठा कर
करते रहो रौशन दर-ओ-दीवार ग़ज़ल के

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हर इक सू हैं दर-ओ-दीवार लेकिन
मुयस्सर है नहीं घर-बार लेकिन

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वक़्त हर वक़्त कहाँ एक सा रह पाता है
माज़ी जाता है तो फिर हाल बदल जाता है

दिन महीने दर-ओ-दीवार वही रहते हैं
बस कैलेंडर है जो हर साल बदल जाता है

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ज़मीं से आसमाँ तक नूर तेरा ही नज़र आया
तुझे जब चाँद ने देखा ज़मीं पर वो उतर आया

खिले हैं फूल के जैसे दर-ओ-दीवार सब घर के
ख़ुशी है रौनक़ें हैं आज मेरा यार घर आया

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वो ही चेहरा वो ही आँखें वो ही दस्त-ओ-बाज़ू
दर-ओ-दीवार न बदली न ही वो घर मेरा

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दिख न जाए उसे मिरी हालत
दर-ओ-दीवार पाट लेता हूँ

वक़्त कटता नहीं मिरा जिस दिन
हाथ की नस ही काट लेता हूँ

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दर-ओ-दीवार पे हसरत से नज़र करते हैं
ख़ुश रहो अहल-ए-वतन हम तो सफ़र करते हैं

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यह वाक्यांश घर की भौतिकता को दर्शाता है, लेकिन कविता में यह अक्सर उस भावनात्मक और आध्यात्मिक आश्रय का प्रतीक बन जाता है जो एक घर प्रदान करता है। दीवारें और दरवाज़े केवल बाधाएँ नहीं हैं, बल्कि यादों और भावनाओं के रक्षक हैं।

'दर–ओ–दीवार' का उपयोग कवि अक्सर व्यक्तिगत स्थानों की निकटता और पवित्रता को दर्शाने के लिए करते हैं। यह एक पारिवारिक घर की गर्माहट या एक परित्यक्त घर की एकांतता को प्रतिबिंबित कर सकता है। यह वाक्यांश बाहरी दुनिया की विशालता के विपरीत भी हो सकता है।

कविता में, 'दर–ओ–दीवार' एक ऐसा कैनवास बन जाता है जिस पर घर के भीतर जीवन की गूंज और अपनत्व की भावना को खोजा जाता है।