Meaning of

दह्र

dehr • دہر

समय; अनंत; संसार

time; eternity; world

وقت; ابدیت; دنیا

Arabic

झूट इतनी बार दुहराना कि सच लगने लगे
इतना रोना-गाना-चिल्लाना कि सच लगने लगे

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रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई

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ये कौन आने जाने लगा उस गली में अब
ये कौन मेरी दास्ताँ दोहराने वाला है

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हुस्न कुछ और नहीं छत की हरी काई है
वक़्त-बे-वक़्त जहाँ पाँव फिसल जाता है

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चश्म हो तो आईना-ख़ाना है दहर
मुँह नज़र आता है दीवारों के बीच

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दहर भर-भर शिकायत के पुलिन्दे हैं ज़ेहन में
लबों पर फिर भी शिकवों का कोई पुर्ज़ा नहीं है

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अब कारगह-ए-दहर में लगता है बहुत दिल
ऐ दोस्त कहीं ये भी तिरा ग़म तो नहीं है

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वुफ़ूर-ए-ग़म में भी कैफ़-ओ-नशात का आलम
निज़ाम-ए-दहर में वजह-ए-सुरूर है कोई

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आँसुओं को रोक के कुछ इस क़दर मैं ने रखा था
डेहरी में हो रखा जैसे अनाजों को सजोकर

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गले जो यारों को जब हम लगाते हैं
तो ग़म-ए-दहर को फिर भूल जाते हैं

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झूट इतनी बार दुहराना कि सच लगने लगे
इतना रोना-गाना-चिल्लाना कि सच लगने लगे

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रहने को सदा दहर में आता नहीं कोई
तुम जैसे गए ऐसे भी जाता नहीं कोई

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दह्र समय की विशालता को दर्शाता है, एक अनंत प्रवाह जो मानव समझ से परे है। कविता में, यह अक्सर अस्तित्व के शाश्वत प्रवाह का प्रतीक होता है, जीवन की क्षणभंगुरता को एक अपरिवर्तनीय ब्रह्मांड की पृष्ठभूमि के खिलाफ याद दिलाता है।

कवि 'दह्र' का उपयोग मृत्यु और स्थायित्व के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह मानव जीवन के क्षणभंगुर क्षणों को समय की शाश्वत प्रकृति के साथ विरोधाभास करता है। अक्सर, यह भाग्य और ब्रह्मांड पर चिंतन के लिए एक पृष्ठभूमि के रूप में कार्य करता है।

दह्र ब्रह्मांड में हमारे स्थान की एक गहरी याद दिलाता है, हमें क्षणभंगुर के बीच शाश्वत पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।