Meaning of

दिल-ओ-ज़ेहन

dil-o-zehn • دل و ذہن

दिल और दिमाग

heart and mind

دل و ذہن

Persian

ये दिल-ओ-ज़ेहन भी चमक उठते
रौशनी इस तरह बनानी थी

उस की नज़रों में भी न आ पाए
जिस के दिल में जगह बनानी थी

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रहे जिस की ख़ुश्बू तमाम उम्र,तू तोहफ़तन वो गुलाब दे
नए रंग भर दिल-ओ-ज़ेहन में, मेरे यार मुझ को किताब दे

मैं शरीफ़-ओ-अहल-ए-जहाँ में 'अच्छों' की झूठी बातों से तंग हूँ
वो जो सामने मेरे सच कहे, मुझे दोस्त ऐसे ख़राब दे

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दिल-ओ-ज़ेहन में मेरे घर कर गए तुम
असरदार थे बे-असर कर गए तुम

सजाकर रखे थे जो एहसास अपने
अचानक इधर से उधर कर गए तुम

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ये दिल-ओ-ज़ेहन भी चमक उठते
रौशनी इस तरह बनानी थी

उस की नज़रों में भी न आ पाए
जिस के दिल में जगह बनानी थी

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रहे जिस की ख़ुश्बू तमाम उम्र,तू तोहफ़तन वो गुलाब दे
नए रंग भर दिल-ओ-ज़ेहन में, मेरे यार मुझ को किताब दे

मैं शरीफ़-ओ-अहल-ए-जहाँ में 'अच्छों' की झूठी बातों से तंग हूँ
वो जो सामने मेरे सच कहे, मुझे दोस्त ऐसे ख़राब दे

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'दिल-ओ-ज़ेहन' मानव अनुभव की द्वैतता को दर्शाता है, जहाँ भावनाएँ और बुद्धि सह-अस्तित्व में हैं। कविता इसे दिल की इच्छाओं और दिमाग की तर्कशीलता के बीच के तनाव और सामंजस्य को खोजकर गहराई देती है।

कवि 'दिल-ओ-ज़ेहन' का उपयोग मानव आत्मा के आंतरिक संघर्षों और समाधान को खोजने के लिए करते हैं। इसे अक्सर जुनून और तर्क के बीच संवाद के रूप में चित्रित किया जाता है।

कविता में, 'दिल-ओ-ज़ेहन' भावना और बुद्धि के अनंत नृत्य के लिए एक कैनवास बन जाता है। यह मानव आत्मा की जटिलता का प्रमाण है।