Meaning of

फ़रव

farw • فرو

फर; खाल

fur; pelt

فر; کھال

Persian

परिंदे लड़ ही पड़े जाएदाद पर आख़िर
शजर पे लिक्खा हुआ है शजर बराए-फ़रोख़्त

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इस लिए ये महीना ही शामिल नहीं उम्र की जंत्री में हमारी
उस ने इक दिन कहा था कि शादी है इस फरवरी में हमारी

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मुसाफ़िरों के दिमाग़ों में डर ज़ियादा है
न जाने वक़्त है कम या सफ़र ज़ियादा है

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अगर बस याद आती फ़रवरी में
तुम्हारा इश्क़ ही सच्चा नहीं था

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ऐसा लगता है कि तन्हाई मुझे छूती है
उँगलियाँ कौन फिरोता है मेरे बालों में

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यूँँ कहें नुमाइशों के दिन क़रीब आ गए
महज़ फ़रवरी हो किस तरह महीना इश्क़ का

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तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर
सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर

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वो गुल-फ़रोश कहाँ अब गुलाब किस से लूँ
नहीं रहा मिरा साक़ी शराब किस से लूँ

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उस के फ़रोग़-ए-हुस्न से झमके है सब में नूर
शम-ए-हरम हो या हो दिया सोमनात का

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रुख़्सार पर है रंग-ए-हया का फ़रोग़ आज
बोसे का नाम मैं ने लिया वो निखर गए

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परिंदे लड़ ही पड़े जाएदाद पर आख़िर
शजर पे लिक्खा हुआ है शजर बराए-फ़रोख़्त

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इस लिए ये महीना ही शामिल नहीं उम्र की जंत्री में हमारी
उस ने इक दिन कहा था कि शादी है इस फरवरी में हमारी

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अपने मूल अर्थ में, 'फ़रव' जानवर के मुलायम, गर्म आवरण को संदर्भित करता है, जो ठंड के खिलाफ एक सुरक्षात्मक परत है। कविता में, यह शब्द प्रिय के आलिंगन की गर्मजोशी और आराम, या प्रकृति की कोमल सुरक्षा को उजागर करता है।

'फ़रव' का उपयोग कवि अक्सर गर्मजोशी और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में करते हैं। यह प्रेमी की कोमल देखभाल या प्रकृति की आरामदायक गोद के लिए एक रूपक हो सकता है। यह शब्द बाहरी दुनिया की कठोरता के विपरीत, कोमलता का एक आश्रय प्रदान करता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'फ़रव' उस कोमल शरण का प्रतीक है जिसे हम प्रेम और प्रकृति में खोजते हैं। यह जीवन की ठंडक से हमें बचाने वाली गर्मजोशी की याद दिलाता है।