Meaning of
फ़र्ज़-ए-किफ़ाया
farz-e-kifaya • فرض کفایہ
Hindi
पर्याप्तता का कर्तव्य; सामुदायिक दायित्व
English
duty of sufficiency; communal obligation
Urdu
کفایت کا فرض; اجتماعی ذمہ داری
Origin
Arabic
Nuance
अपने मूल में, 'फ़र्ज़-ए-किफ़ाया' उस कर्तव्य को संदर्भित करता है, जिसे यदि कुछ लोग पूरा कर लें, तो अन्य लोग उस दायित्व से मुक्त हो जाते हैं। यह सामुदायिक जिम्मेदारी का भार वहन करता है, जहाँ सामूहिक विवेक सक्रिय होता है। कविता में, यह अक्सर साझा बोझ और अनकहे कर्तव्यों का प्रतीक होता है जो समुदायों को एक साथ बाँधते हैं।
Poetic Usage
'फ़र्ज़-ए-किफ़ाया' का उपयोग कवि अक्सर साझा कर्तव्य और सामूहिक जिम्मेदारी के विषयों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह समाज के भीतर मौन समझौतों को दर्शा सकता है। यह व्यक्तिगत दायित्वों के विपरीत होता है, व्यक्तिगत और सामुदायिक भूमिकाओं के बीच तनाव को उजागर करता है।
Closing Insight
कविता के क्षेत्र में, 'फ़र्ज़-ए-किफ़ाया' हमें बाँधने वाले कर्तव्य के मौन तारों के साथ गूंजता है। यह उन अदृश्य धागों की याद दिलाता है जो समुदायों को एक साथ बुनते हैं।