Meaning of

फ़ेर

fer • فیر

मोड़; परिवर्तन; चक्र

turn; change; cycle

موڑ; تبدیلی; چکر

Persian

मुँह फेर कर के जा रहे कुछ बात है क्या
जानी बहुत शरमा रहे कुछ बात है क्या

जो लोग तुम सेे दूर रहते थे कभी अब
वो दोस्ती समझा रहे कुछ बात है क्या

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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने
वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी

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काश वो रास्ते में मिल जाए
मुझ को मुँह फेर कर गुज़रना है

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आप तो मुँह फेर कर कहते हैं आने के लिए
वस्ल का वा'दा ज़रा आँखें मिला कर कीजिए

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मैं ने तो यूँँही राख में फेरी थीं उँगलियाँ
देखा जो ग़ौर से तिरी तस्वीर बन गई

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मिल गए थे एक बार उस के जो मेरे लब से लब
उम्र भर होंटों पे अपने मैं ज़बाँ फेरा किया

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मुँह फेर कर वो कहते हैं बस मान जाइए
इस शर्म इस लिहाज़ के क़ुर्बान जाइए

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तेरी शोहरत ने तुझ को चाहने वाला दिया लेकिन
बता ऐ बे-वफ़ा लड़की वो लोफ़र क्यूँ नहीं आता

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आ के नज़दीक मुँह न फेर ग़ज़ल
पास आ बैठ थोड़ी देर ग़ज़ल

सब तेरे नूर से चमकते हैं
लफ़्ज़ मिसरे ख़याल शे'र ग़ज़ल

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कोई मुँह फेर लेता है तो 'क़ासिर' अब शिकायत क्या
तुझे किस ने कहा था आइने को तोड़ कर ले जा

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मुँह फेर कर के जा रहे कुछ बात है क्या
जानी बहुत शरमा रहे कुछ बात है क्या

जो लोग तुम सेे दूर रहते थे कभी अब
वो दोस्ती समझा रहे कुछ बात है क्या

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निगाहें फेर ली घबरा के मैं ने
वो तुम से ख़ूब-सूरत लग रही थी

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'फ़ेर' का मूल अर्थ मोड़ या दिशा में परिवर्तन है। कविता में, यह जीवन और भावनाओं की चक्रीय प्रकृति को दर्शाता है, परिवर्तन की अनिवार्यता और शुरुआत की ओर लौटने को पकड़ता है।

कवि 'फ़ेर' का उपयोग समय के प्रवाह और प्रकृति के चक्रों को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह नवीनीकरण या भाग्य की अनिवार्यता का संकेत दे सकता है। अक्सर स्थिर या अपरिवर्तनीय तत्वों के विपरीत होता है।

जीवन के नृत्य में, 'फ़ेर' हमें परिवर्तन की सुंदरता और चक्रों में आराम की याद दिलाता है।