Meaning of

ग़र्क

gark • غرق

डूबा हुआ; मग्न

drowned; immersed

غرق; محو

Arabic

चश्म-ए-पुर-नम में बाद-ए-हिज्र शजर
लश्कर-ए-ख़्वाब ग़र्क़ होने लगे

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ग़म अगरचे जाँ-गुसिल है प कहाँ बचें कि दिल है
ग़म-ए-इश्क़ गर न होता ग़म-ए-रोज़गार होता

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इलाही एक ग़म-ए-रोज़गार क्या कम था
कि इश्क़ भेज दिया जान-ए-मुब्तला के लिए

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बचा लिया मुझे ग़र्क़ाब होने से उस ने
जुनून ए इश्क़ है लाया नदी के पार मुझे

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और फिर वो किसी के बस में नहीं
जो परिंदे किसी क़फ़स में नहीं

वो कहीं जा के गर्क़ हो जाए
जो बदन मेरी दस्तरस में नहीं

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हम को तो कोई तिनका सा छू कर डुबो गया
मौजों की भूल कुछ न थी सागर डुबो गया

क्यूँँ दोष दे रहे हैं सभी गर्क़-ए-आब को
मुझ को तो यार मेरा मुक़द्दर डुबो गया

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सतह से तह तलक होना पड़ेगा गर्क ही तुम को
समुंदर के किनारे पर कभी मोती नहीं मिलते

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मेरा ही अहबाब मिरा क़ातिल निकला
सो ग़र्क़ी में हाथ मिरा शामिल निकला

रोज़ मिसालें देता जिस की बातों की
दुनिया में वो ही ज़्यादा बातिल निकला

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कुछ देर बा'द डूब गईं ऐसे ख़्वाहिशें
पानी में जैसे गर्क़ हो काग़ज़ की कोई नाव

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चश्म-ए-पुर-नम में बाद-ए-हिज्र शजर
लश्कर-ए-ख़्वाब ग़र्क़ होने लगे

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ग़म अगरचे जाँ-गुसिल है प कहाँ बचें कि दिल है
ग़म-ए-इश्क़ गर न होता ग़म-ए-रोज़गार होता

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'ग़र्क' शब्द डूबने की छवि को उभारता है, चाहे वह पानी में हो या भावनाओं में। कविता में, यह अक्सर भावनाओं, विचारों, या अनुभवों में गहरी डूबने का प्रतीक होता है, जहाँ व्यक्ति पूरी तरह से खो जाता है।

कवि 'ग़र्क' का उपयोग भावनाओं की तीव्रता, प्रेम या दुःख की प्रबलता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह जुनून या निराशा से ग्रस्त होने की स्थिति को दर्शा सकता है, जहाँ आत्मा गहराइयों में खो जाती है।

कविता में, 'ग़र्क' आत्मा की गहन यात्रा का रूपक बन जाता है, जहाँ खो जाना गहरी सच्चाइयों की खोज का मार्ग है।