Meaning of

ग़ुनाह

ghunaah • گناہ

पाप; अपराध; नैतिक ग़लती

sin; transgression; moral wrongdoing

گناہ; جرم; اخلاقی غلطی

Arabic

दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

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गुनाहगार को इतना पता तो होता है
जहाँ कोई नहीं होता ख़ुदा तो होता है

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हम एक रात हुए थे क़रीब और क़रीब
फिर उस के बा'द का क़िस्सा गुनाह जैसा है

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कोई समझे तो एक बात कहूँ
इश्क़ तौफ़ीक़ है गुनाह नहीं

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नाम आया है तेरा जब से गुनहगारों में
सब गवाह अपनी गवाही से मुकरना चाहें

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उम्र-भर के सज्दों से मिल नहीं सकी जन्नत
ख़ुल्द से निकलने को इक गुनाह काफ़ी है

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मिरे गुनाह की मुझ को सज़ा नहीं देता
मिरा ख़ुदा कहीं नाराज़ तो नहीं मुझ से

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यूँँ ज़िंदगी गुज़ार रहा हूँ तिरे बग़ैर
जैसे कोई गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

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इक फ़ुर्सत-ए-गुनाह मिली वो भी चार दिन
देखे हैं हम ने हौसले परवरदिगार के

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क़सम ख़ुदा की बड़े तजरबे से कहता हूँ
गुनाह करने में लज़्ज़त तो है सुकून नहीं

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दिल में किसी के राह किए जा रहा हूँ मैं
कितना हसीं गुनाह किए जा रहा हूँ मैं

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गुनाहगार को इतना पता तो होता है
जहाँ कोई नहीं होता ख़ुदा तो होता है

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अपने मूल अर्थ में, 'ग़ुनाह' एक ऐसे कार्य को संदर्भित करता है जो नैतिक या दिव्य कानून के खिलाफ जाता है। कविता में, यह अक्सर अपराधबोध के भार और आत्मा के आंतरिक संघर्ष को उजागर करता है। यह शब्द निषिद्ध आकर्षण की भावना को वहन करता है, जैसे कि पाप करना एक बोझ और प्रलोभन दोनों है।

'ग़ुनाह' का उपयोग कवि अक्सर अपराधबोध और मोक्ष के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह उन निषिद्ध इच्छाओं का प्रतीक हो सकता है जो आंतरिक संघर्ष की ओर ले जाती हैं। कभी-कभी इसे पवित्रता या मासूमियत के विपरीत रखा जाता है, जो मानव स्वभाव की द्वैतता को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'ग़ुनाह' मानव हृदय की जटिलताओं को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह एक ऐसा शब्द है जो नैतिकता और इच्छा के किनारे पर नृत्य करता है।