Meaning of

ग़ुज़ार

guzaar • گزار

गुज़रना; बिताना; सहना

to pass; to spend; to endure

گزرنا; گزارنا; برداشت کرنا

Persian

हम भी क्या ज़िंदगी गुज़ार गए
दिल की बाज़ी लगा के हार गए

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे
अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे

मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी
उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे

206

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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है
फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है

तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती
तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है

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जो गुज़ारी न जा सकी हम से
हम ने वो ज़िन्दगी गुज़ारी है

136

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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था
तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे

ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया
मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

129

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मोहब्बत अपनी क़िस्मत में नहीं है
इबादत से गुज़ारा कर रहे है

115

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जो मेरे साथ मोहब्बत में हुई आदमी एक दफा सोचेगा
रात इस डर में गुजारी हम ने कोई देखेगा तो क्या सोचेगा

88

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तुम्हारे बिन गुज़ारी रात के बस दो ही क़िस्से हैं
कभी हिचकी नहीं रुकती कभी सिसकी नहीं रुकती

87

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मैं तमाम दिन का थका हुआ तू तमाम शब का जगा हुआ
ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ

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मैं न सोया रात सारी तुम कहो
बिन मेरे कैसे गुज़ारी, तुम कहो

हिज्र, आँसू, दर्द, आहें, शा'इरी
ये तो बातें थीं हमारी, तुम कहो

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हम भी क्या ज़िंदगी गुज़ार गए
दिल की बाज़ी लगा के हार गए

54

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे
अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे

मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी
उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे

206

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अपने मूल अर्थ में, 'गुज़ार' समय या घटनाओं के गुजरने की बात करता है, अक्सर सहनशीलता की एक छाया के साथ। कविता ने इस शब्द को जीवन की शांत सहनशीलता, खुशियों और दुखों के बीच की चुपचाप यात्रा को व्यक्त करने के लिए अपनाया है।

कवि अक्सर 'गुज़ार' का उपयोग समय के गुजरने, कठिनाइयों के सहन करने, या खुशी की क्षणभंगुरता को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह स्थायित्व या ठहराव को दर्शाने वाले शब्दों के विपरीत है।

कविता में, 'गुज़ार' जीवन की क्षणभंगुर सुंदरता और सहनशीलता में पाई जाने वाली शांत शक्ति की एक कोमल याद दिलाता है।