Meaning of

हर्ज़

harz • حرز

हानि; नुकसान; क्षति

harm; damage; loss

نقصان; ضرر; خسارہ

Arabic

हम चाहते हैं जिन को वो पास नहीं रहते
दाइम किसी की ख़ातिर हम ख़ास नहीं रहते

अब लोग बदलने में याँ वक़्त लगाते नइँ
ख़ुद-ग़र्ज़ ज़माने में इख़्लास नहीं रहते

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मुझ को न दिल पसंद न वो बे-वफ़ा पसंद
दोनों हैं ख़ुद-ग़रज़ मुझे दोनों हैं ना-पसंद

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मुफ़्लिसी में ज़कात कोई करे
बे-ग़रज़ मुझ सेे बात कोई करे

मुस्कुराते छिपा लिया दुख बहुत
दुख से हम को नजात कोई करे

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नफ़रत धोका बुग़्ज़ तअ'स्सुब झूट दिखावा ख़ुद-ग़रज़ी
कैसे कैसे ज़हर भरे हैं इंसाँ की शिरयानों में

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अब तो मौक़ा मुझे भी दिया जाए जी
ये जहाँ जीत लाऊँ तो क्या हर्ज़ है

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ख़ुद-ग़रज़ दुनिया की तस्वीरों को आँखों में छुपाकर
क्या कहें ज़िंदा है अब तक भी वफ़ा दिल में हमारे

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मरना जब मैं ने तन्हा है तो फिर,
हर्ज़ ही क्या है तन्हा जीने में.

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कोई बेहतर मिला है अब उसे मुझ सेे
नहीं है हर्ज़ कोई मुझ को खोने में

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मैं ज़ीस्त में अपनी कभी ख़ुद ग़र्ज तो होता नहीं
जो चाहिए दुनिया को मैं जो मर्द वो होता नहीं

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नक़ली आँसू झूठी क़स्में सब पर्दे हैं नज़ाकत के
बस बाज़ार लगे हैं जज़्बों के सौदे हैं शराफ़त के

ख़ुद-ग़रज़ी के हैं अल्फ़ाज़ मोहब्बत के अफ़साने में
फिर भी लाते हैं चेहरे पर झूठे रंग इनायत के

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हम चाहते हैं जिन को वो पास नहीं रहते
दाइम किसी की ख़ातिर हम ख़ास नहीं रहते

अब लोग बदलने में याँ वक़्त लगाते नइँ
ख़ुद-ग़र्ज़ ज़माने में इख़्लास नहीं रहते

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मुझ को न दिल पसंद न वो बे-वफ़ा पसंद
दोनों हैं ख़ुद-ग़रज़ मुझे दोनों हैं ना-पसंद

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'हर्ज़' शब्द हानि या क्षति की भावना को व्यक्त करता है, जो अक्सर भौतिक से परे होती है। कविता में, यह जीवन द्वारा दिए गए भावनात्मक और अस्तित्वगत घावों को पकड़ता है। यह मानव अस्तित्व के साथ आने वाले अनिवार्य दर्द को व्यक्त करता है।

कवि अक्सर 'हर्ज़' का उपयोग पीड़ा और सहनशीलता के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह उपचार और पुनर्प्राप्ति के विपरीत है। यह शब्द जीवन की परीक्षाओं की मौन सहनशीलता को जागृत करता है।

कविता में, 'हर्ज़' मानव आत्मा की पीड़ा को सहने और पार करने की क्षमता का प्रमाण बन जाता है। यह कमजोरी में पाई जाने वाली मौन शक्ति को दर्शाता है।