Meaning of

हिज्राँ

hijraan • ہجراں

वियोग; लालसा

separation; longing

جدائی; آرزو

Arabic

देख लो आ के शजर हम ने ग़म-ए-हिज्राँ में
अश्क दहलीज़ पे आँखों की सजा रक्खे हैं

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सब्र था एक मूनिस-ए-हिज्राँ
सो वो मुद्दत से अब नहीं आता

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शब-ए-हिज्राँ में सुनता था, सलीब-ए-वक़्त की सिसकी
ये कुछ पागल समझते हैं घड़ी आवाज़ करती है

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ऐ ग़में हिज्रां यूँँ रह रह के जलाओ न मुझे
वक़्त गुजरा तू भी आ आ के सताओ न मुझे

चैन से जीने दे मुझ को ओ मेरे ख़्वाब-ओ-ख़्याल
मिट चुकी कब की सुनो ऐसे मिटाओ न मुझे

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मेरे हम उम्र साथी इश्क़ में गर टूट जाए दिल
ग़म-ए-हिज्राँ में इक महफ़िल सजाना, शा'इरी करना

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इस महीने में ग़म-ए-हिज्राँ मिला है
इस लिए नफ़रत है माह-ए-फ़रवरी से

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शब-ए-हिज्रां बुझा बैठी हूँ मैं सारे सितारे पर
कोई फ़ानूस रौशन है ख़मोशी से मेरे अंदर

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ये शब-ए-हिज्राँ है तो आप पे वाजिब है शजर
हिज्र-ए-महबूब में गिर्या करो सीना पीटो

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आख़िर को मिरे हाल पे वो शख़्स भी रोया
कहता था जो कुछ भी नहीं दर्द-ए-ग़म-ए-हिज्राँ

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शब-ए-हिज्राँ में गुज़री उम्र है सारी
नहीं मालूम मुझ को शहर ये क्या है

कि दिल की बात काग़ज़ पर सजाता हूँ
नहीं मालूम मुझ को बहर ये क्या है

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देख लो आ के शजर हम ने ग़म-ए-हिज्राँ में
अश्क दहलीज़ पे आँखों की सजा रक्खे हैं

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सब्र था एक मूनिस-ए-हिज्राँ
सो वो मुद्दत से अब नहीं आता

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हिज्राँ दिल के वियोग की पीड़ा को व्यक्त करता है। यह दूरी से उत्पन्न होने वाले दर्द और लालसा को समेटे हुए है, अक्सर कविता में एक प्रिय के लिए गहरी तड़प को व्यक्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।

कवि अक्सर 'हिज्राँ' का उपयोग प्रिय से दूर होने की भावनात्मक उथल-पुथल को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह दिल की मौन पुकार और पुनर्मिलन की अनंत प्रतीक्षा का प्रतीक हो सकता है।

अनुपस्थिति की गूंज में, 'हिज्राँ' अपनी आवाज़ पाता है, आत्मा की गहरी इच्छाओं के साथ गूंजता है।