Meaning of

इन्तज़ार

intezaar • انتظار

प्रतीक्षा; इंतज़ार

waiting; anticipation

انتظار; توقع

Arabic

उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में

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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़
किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे

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सब इंतिज़ार में थे कब कोई ज़बान खुले
फिर उस के होंठ खुले और सबके कान खुले

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न हुआ नसीब क़रार-ए-जाँ हवस-ए-क़रार भी अब नहीं
तिरा इंतिज़ार बहुत किया तिरा इंतिज़ार भी अब नहीं

तुझे क्या ख़बर मह-ओ-साल ने हमें कैसे ज़ख़्म दिए यहाँ
तिरी यादगार थी इक ख़लिश तिरी यादगार भी अब नहीं

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लौट कर नहीं आता कब्र से कोई लेकिन
प्यार करने वालों को इंतिज़ार रहता है

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जान-लेवा थीं ख़्वाहिशें वर्ना
वस्ल से इंतिज़ार अच्छा था

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तुझे कैसे इल्म न हो सका बड़ी दूर तक ये ख़बर गई
तिरे शहर ही की ये शाएरा तिरे इंतिज़ार में मर गई

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ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता
अगर और जीते रहते यही इंतिज़ार होता

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कोई इशारा दिलासा न कोई वा'दा मगर
जब आई शाम तिरा इंतिज़ार करने लगे

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उम्र-ए-दराज़ माँग के लाई थी चार दिन
दो आरज़ू में कट गए दो इंतिज़ार में

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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं
तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख

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‘इन्तज़ार’ शब्द प्रतीक्षा और धैर्य का भाव उत्पन्न करता है। मूल रूप में यह केवल प्रतीक्षा का अर्थ देता है, लेकिन कविता ने इसे एक गहरी भावनात्मक गूंज दी है। यह प्रत्याशा की चुप्पी और आने वाले की चाहत को व्यक्त करता है।

कवि अक्सर 'इन्तज़ार' का उपयोग प्रिय के इंतज़ार की मिठास और कड़वाहट को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आशा, चाहत और समय के गुजरने का प्रतीक हो सकता है। यह शब्द पूर्ति के विपरीत है, अधूरी इच्छाओं की सुंदरता और पीड़ा को उजागर करता है।

‘इन्तज़ार’ में आशा और निराशा के बीच का नाज़ुक संतुलन मिलता है। यह मानव चाहत के सार को पकड़ने वाला शब्द है।