Meaning of

जज़्बे

jazbe • جذبے

भावनाएँ; जुनून

emotions; passions

جذبات; جذباتی کیفیات

Arabic

होता है आख़िरी जज़्बे की तरह पहला इश्क़
आख़िरी इश्क़ तो पहले की तरह होता है

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सब कर लेना लम्हे ज़ाया' मत करना
ग़लत जगह पर जज़्बे ज़ाया' मत करना

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आँखें तरस रही हैं जज़्बे पिघल रहे हैं
अनफ़ास को हमारे लम्हे निगल रहे हैं

जज़्बात के शजर पर बरसात है ग़मों की
एहसास के सफ़र में हम रुख़ बदल रहे हैं

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तेज़ आंधी में जज्बे नहीं बच सकेंगे
ये तना शाख पत्ते नहीं बच सकेंगे

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भेदता किरणों से अपनी तीरगी को
सूर्य उठता आ रहा देखो उफ़ुक़ पर

जीतनी है तुम को गर हर इक चुनौती
टांग दो डर को उठा जज़्बे की हुक पर

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कितना मुश्किल किसी जज़्बे को मआ'नी देना
यूँँ तो आसाँ है किसी बात को पानी देना

ये हक़ीक़त है कि कल वो भी बिछड़ जाएगा
आज के झूठ को क्या कल की कहानी देना

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दिल वो ख़ेमा है जहाँ मरते हैं जज़्बे घुटकर
चश्म वो दश्त हैं जो ख़ून से तर रहते हैं

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होता है आख़िरी जज़्बे की तरह पहला इश्क़
आख़िरी इश्क़ तो पहले की तरह होता है

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सब कर लेना लम्हे ज़ाया' मत करना
ग़लत जगह पर जज़्बे ज़ाया' मत करना

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मूल रूप से 'जज़्बे' उन गहरी भावनाओं या जुनूनों को दर्शाता है जो मानव क्रियाओं को प्रेरित करते हैं। कविता ने इस शब्द को अपनाया है ताकि मानव भावनाओं के विशाल समुद्र का अन्वेषण किया जा सके, जिसमें प्रेम और तड़प से लेकर क्रोध और निराशा तक शामिल हैं। यह उन तीव्रता और उत्साह को पकड़ता है जो अक्सर अनकहे रह जाते हैं लेकिन गहराई से महसूस किए जाते हैं।

'जज़्बे' का उपयोग कवि अक्सर अपने पात्रों की भावनात्मक परिदृश्यों में गहराई से उतरने के लिए करते हैं, प्रेम, बलिदान और आंतरिक उथल-पुथल के विषयों का अन्वेषण करते हैं। यह एक ऐसा शब्द है जो मानव अनुभव के कच्चे, बिना छाने सार को उजागर करता है।

कविता में, 'जज़्बे' दिल की गहरी फुसफुसाहटों का एक माध्यम बन जाता है। यह महसूस करने में निहित शक्ति और नाजुकता की याद दिलाता है।