आँखें तरस रही हैं जज़्बे पिघल रहे हैंअनफ़ास को हमारे लम्हे निगल रहे हैंजज़्बात के शजर पर बरसात है ग़मों कीएहसास के सफ़र में हम रुख़ बदल रहे हैं— divya 'sabaa'