Meaning of

जु़र्म

jurm • جرم

अपराध; गलती; पाप

crime; offense; sin

جرم; خطا; گناہ

Arabic

ज़रा सी देर कोई मुझ
में रूनुमा हुआ था
फिर उस के बा'द नहीं जानता मैं क्या हुआ था

नए गुनाह की मुझे इस लिए इजाज़त है
मैं पिछले जुर्म में ताख़ीर से रिहा हुआ था

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हम ने क़ुबूल कर लिया अपना हर एक जुर्म
अब आप भी तो अपनी अना छोड़ दीजिए

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जुर्म में हम कमी करें भी तो क्यूँँ
तुम सज़ा भी तो कम नहीं करते

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जो कहता है वैसे करना पड़ता है
इतना प्यारा है कि डरना पड़ता है

आँखें काली कर देता है उस का दुख
सब को ये जुर्माना भरना पड़ता है

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फ़रेब दे गया इस सादगी से वो मुझ को
कि जुर्म सारा ही मजबूरियों के सर आया

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मिन्नतें करता था रुक जाओ मेरा कोई नहीं
मेरे रोके से मगर कौन रुका कोई नहीं

बेवफ़ाई को बड़ा जुर्म बताने वाले
याद है तू ने भी चल छोड़ हटा कोई नहीं

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ज़िंदगी से बड़ी सज़ा ही नहीं
और क्या जुर्म है पता ही नहीं

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ख़ुद-कुशी जुर्म भी है सब्र की तौहीन भी है
इस लिए इश्क़ में मर मर के जिया जाता है

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मिरी सुब्ह का यूँँ भी इज़हार हो
पियाला हो कॉफ़ी का अख़बार हो

कोई जुर्म साबित न हो उस का फिर
जो तेरी हँसी में गिरफ़्तार हो

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मुंसिफ़ हो अगर तुम तो कब इंसाफ़ करोगे
मुजरिम हैं अगर हम तो सज़ा क्यूँँ नहीं देते

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ज़रा सी देर कोई मुझ
में रूनुमा हुआ था
फिर उस के बा'द नहीं जानता मैं क्या हुआ था

नए गुनाह की मुझे इस लिए इजाज़त है
मैं पिछले जुर्म में ताख़ीर से रिहा हुआ था

20

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हम ने क़ुबूल कर लिया अपना हर एक जुर्म
अब आप भी तो अपनी अना छोड़ दीजिए

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'जुर्म' अपने मूल में नैतिक या कानूनी सीमाओं का उल्लंघन करने वाले कृत्य को संदर्भित करता है। कविता में, यह अक्सर गलत कार्यों से जुड़े आंतरिक संघर्ष और अपराधबोध में गहराई से उतरता है, मानव स्थिति और मुक्ति के संघर्ष पर विचार करता है।

कवि 'जुर्म' का उपयोग अपराधबोध और मुक्ति के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अंतरात्मा के भार और क्षमा की खोज का प्रतीक हो सकता है। अक्सर मासूमियत के साथ विपरीत, यह मानव प्रकृति की द्वैतता को उजागर करता है।

'जुर्म' आत्मा की छायाओं का दर्पण है, हमारी त्रुटियों और मुक्ति की अनंत आशा की याद दिलाता है। यह अंतरात्मा की मौन गूंज है।