Meaning of

जुज़

juz • پوچھوں

भाग; अंश

part; portion

حصہ; جز

Arabic

ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने
लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई

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तारीख़ आ गई है उधर कार्ड छप गए
अब कब कहेगी तुझ को वो लड़का नहीं पसंद

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मैं किस से पूछूँ ये रस्ता दुरुस्त है कि ग़लत
जहाँ से कोई गुज़रता नहीं वहाँ हूँ मैं

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वक़्त बदलेगा तो इस बार मैं पूछूँगा उसे
तुम बदलते हो तो क्यूँँ लोग बदल जाते हैं

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काश मैं पूछूँ कभी मीठे में क्या है
वो बिना सोचे कहे लो होंठ मेरे

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यकुम जनवरी है नया साल है
दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है

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कूज़ा-गर मिल गया तो पूछूँगा
मेरी मिट्टी कहाँ से लाया था

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है ख़ुशी इंतिज़ार की हर दम
मैं ये क्यूँँ पूछूँ कब मिलेंगे आप

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ब-जुज़ ख़ुदा के किसी का हम पे करम नहीं है ये कम नहीं है
किसी का सजदा जबीं पे अपनी रक़म नहीं है ये कम नहीं है

हमारी चुप्पी ये है ग़नीमत वगरना ये जो किया है तुम ने
यक़ीन मानो हमारा माथा गरम नहीं है ये कम नहीं है

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कोर्ट में तारीख़ के ये सिलसिले चलते रहे
और वो लड़की वहाँँ पर शर्म से ही मर गई

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ये जब्र भी देखा है तारीख़ की नज़रों ने
लम्हों ने ख़ता की थी सदियों ने सज़ा पाई

22

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तारीख़ आ गई है उधर कार्ड छप गए
अब कब कहेगी तुझ को वो लड़का नहीं पसंद

79

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'जुज़' अपने सार में एक पूरे का टुकड़ा है, एक ऐसा अंश जो बड़े ढांचे में योगदान देता है। यह विभाजन और एकता के विचार को समेटे हुए है, जहाँ प्रत्येक भाग का महत्व है।

कवि 'जुज़' का उपयोग विखंडन और संपूर्णता के विषयों को खोजने के लिए करते हैं। यह मानव स्थिति को दर्शा सकता है, जहाँ व्यक्ति एक बड़े समाज का हिस्सा होते हैं, या आत्मा की यात्रा जो पूर्णता की तलाश में होती है।

कविता में, 'जुज़' हमें अंशों की सुंदरता और संपूर्णता की खोज की याद दिलाता है।