Meaning of

कालिख़

kaalikh • کالک

कालिख; काला धब्बा; दाग

soot; blackness; stain

کالک; سیاہی; داغ

Sanskrit

कहो यार 'कालिख़' कि क्या ही करोगे
मुसलसल करेंगे सफ़र ज़िंदगी भर

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तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा
कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं
इश्क़ में पागल ही तो होना होता है
पागल हैं जो मुझ को पागल कहते हैं

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तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा
कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं

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एक तरफ़ उँगलियों पे चुनाव की कालिख
एक तरफ़ उड़ती दिखे शमशान की कालिख

एक तरफ़ जनता जो जल के ख़ाक हो रही
एक तरफ़ इंसनियत पर पुत रही कालिख

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बिछड़ जाती है कालिख कोयले से
बिछड़ने का अगर हासिल हो हीरा

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बदलना गर बुराई का सबब है
तो अपने चेहरे में कालिख़ लगा लो

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यहाँ चेहरे सभी जैसे भरी ‘कालिख़’
बचे कुछ साफ़ उन
में रंग भरने दो

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ज़िंदगी में मोड़ कालिख़ आगे ऐसे आएँगे
याद बातें आएँगी बिन ध्यान जो सुनता रहा

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ज़ख़्मी से दिन हैं आजकल 'कालिख़' यहाँ
तुम याद जाने इस क़दर क्यूँँ आ रहे

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कमियाँ निकालकर मेरी बेहतर बना दिया
उस एक लड़की ने मुझे शाइ'र बना दिया

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कहो यार 'कालिख़' कि क्या ही करोगे
मुसलसल करेंगे सफ़र ज़िंदगी भर

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तुम ने जब से अपनी पलकों पर रक्खा
कालिख़ को सब काजल काजल कहते हैं
इश्क़ में पागल ही तो होना होता है
पागल हैं जो मुझ को पागल कहते हैं

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कालिख एक गहरी, व्यापक अंधकार का सुझाव देती है जो भौतिक और रूपक दोनों को दाग सकता है। कविता में, यह अक्सर नैतिक भ्रष्टाचार या पिछले कर्मों की छाया का प्रतीक होती है।

कवि कालिख का उपयोग दूषित पवित्रता या खोई हुई मासूमियत की छवि को उभारने के लिए करते हैं। यह प्रकाश के साथ विपरीत हो सकता है, अच्छाई और बुराई के बीच संघर्ष को उजागर करता है।

कालिख हमें हमारे जीवन के कोनों में बने रहने वाली छायाओं की याद दिलाती है। यह प्रकाश के बीच अंधकार की स्थायी उपस्थिति का प्रमाण है।