Meaning of

कश्कोल

kashkol • کشکول

भिक्षा पात्र; विनम्रता का प्रतीक; आध्यात्मिक खोज

begging bowl; symbol of humility; spiritual quest

بھیک کا کٹورا; عاجزی کی علامت; روحانی تلاش

Persian

अंधा बना के हाथ में कश्कोल रख दिया
धोखा मिला है मुल्क को अंधे सफ़ीर से

वो जिस्म ढूँढ़ता है मिरे ख़्वाब बेच कर
टकरा रहा है ख़्वाहिशों का दुख ज़मीर से

0

Download Image

बात पे बात बोल दो ना अब
दिल मिरा यार तोल दो ना अब

हैं बड़े ही ख़राब हम 'रौनक'
यार कश्कोल मोल दो ना अब

5

Download Image

भीख ये हर साल मुझ को कम से कम दो बार दो
आँखों के कश्कोल को तुम भीख में दीदार दो

2

Download Image

राह से भटके हुए हम घर भी छूटा सो अलग
बा'द में फिर रहज़नों ने हम को लूटा सो अलग

इस नगर में हम फ़क़ीरों की बुरी हालत हुई
भीख भी पाई नहीं कश्कोल टूटा सो अलग

2

Download Image

रात में चाँद- सितारे ही भले लगते हैं
उस के कश्कोल में सूरज तो नहीं दे सकते

0

Download Image

अंधा बना के हाथ में कश्कोल रख दिया
धोखा मिला है मुल्क को अंधे सफ़ीर से

वो जिस्म ढूँढ़ता है मिरे ख़्वाब बेच कर
टकरा रहा है ख़्वाहिशों का दुख ज़मीर से

0

Download Image

बात पे बात बोल दो ना अब
दिल मिरा यार तोल दो ना अब

हैं बड़े ही ख़राब हम 'रौनक'
यार कश्कोल मोल दो ना अब

5

Download Image

मूल रूप में, 'कश्कोल' दरवेशों और भिक्षुओं द्वारा उपयोग किया जाने वाला एक साधारण पात्र है, जो विनम्रता और भौतिक संपत्ति के त्याग का प्रतीक है। कविता में, यह एक आध्यात्मिक यात्रा पर निकले साधक की छवि को उभारता है, जो सरलता और आत्मनिरीक्षण को अपनाता है।

'कश्कोल' का उपयोग कवि अक्सर तपस्या और आध्यात्मिक लालसा के जीवन को चित्रित करने के लिए करते हैं। यह धन और वैभव की छवियों के विपरीत है, सत्य की खोज में आत्मा की पवित्रता को उजागर करता है।

कश्कोल एक आत्मा की शांत गरिमा को दर्शाता है जो भौतिक इच्छाओं से मुक्त है। यह हृदय की गहरी लालसाओं का पात्र है।