अंधा बना के हाथ में कश्कोल रख दियाधोखा मिला है मुल्क को अंधे सफ़ीर सेवो जिस्म ढूँढ़ता है मिरे ख़्वाब बेच करटकरा रहा है ख़्वाहिशों का दुख ज़मीर से— Anchal Maurya