Anchal Maurya

Anchal Maurya

@anchal_poetries

Anchal Maurya shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Anchal Maurya's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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  • Sher
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Sher

उन से कह दो के वो अब बाम पे आया न करें कितने लोगों को वो बर्बाद किया करते हैं — Anchal Maurya
तमन्ना उस कली की है फ़क़त मुझ को जिसे सब तितलियाँ ख़ालिस बताती हैं — Anchal Maurya
तुम्हीं तो इश्क़ की राहों में आ गए यारों तुम्हें तो मैं ने था रोका कि मेरे यार नहीं — Anchal Maurya
हुआ यूँँ फिर मैं बाग़ीचे टहलते ही रहा यारों मुझे इक अप्सरा को उस के जैसा फूल देना था — Anchal Maurya
ग़ज़लें कभी मेरी पढेंगे उस के बच्चे गर तो बे-वफाई अपनी माँ की देख रो देंगे — Anchal Maurya
नहीं है प्यार हम को यार तुम सेे अब चलो ये झूठ फिर इक बार कहते हैं — Anchal Maurya
ग़ज़ब ज़िंदगी जी रहा हूँ बुरी है मगर पी रहा हूँ — Anchal Maurya
सभी रस्म-ओ-रिवाजों से परे 'अंचल' चलो ऐसी भी इक दुनिया बसाते हैं — Anchal Maurya
कटेगी ज़िंदगी कैसे तिरी 'अंचल' जहाँ में तू मुहब्बत हार बैठा है — Anchal Maurya
अपने हुजरे में पड़ा रहता है चुप-चाप 'अंचल' लोग आवाज़ पे आवाज़ दिया करते हैं — Anchal Maurya
यारों मैं भीम भी तो हुआ करता था मगर पंछी की आँख ने मुझे अर्जुन बना दिया — Anchal Maurya
बे-सबब यूँँ मुस्कुराता हूँ मगर सच कहूँ तो दिल मेरा उदास है — Anchal Maurya
ये जो तुम मुहब्बत मुहब्बत किए जा रहे हो तो फिर तुम बता दो ये मुझ को कि क्या है मुहब्बत — Anchal Maurya
काश ये ज़िंदगी फिर वहीं ले चले अजनबी हम जहाँ पर रहे थे कभी — Anchal Maurya
वज़्न तो था नहीं आँख के आँसू में दर्द हल्के निकलकर सभी कर गया — Anchal Maurya

Ghazal

जो कही उस सेे ज़ियादा अनकही अच्छी लगेगी दिल सुने गर दिल की तो फिर ख़ामुशी अच्छी लगेगी इस कड़ी गर्मी में तेरी छाँव मिल आए अगरचे गर्दिश-ए-दौराँ में भी ये ज़िंदगी अच्छी लगेगी तुम को भी महसूस होगा इस दिल-ए-मुज़्तर का ग़म जब ज़ाविया तुम पर खुलेगा शा'इरी अच्छी लगेगी हसरतें सब मोम के मानिंद पिघलें बा'द उस के चाँदनी में तीरगी की बेरुख़ी अच्छी लगेगी सच तो ये है इख़्तियार-ए-शौक़ जब हो जाएगा तब वक़्त-ए-मर्ग-ए-हिज्र में भी आशिक़ी अच्छी लगेगी मौत की उस शाहज़ादी के गले लग जाएँगे फिर रफ़्ता-रफ़्ता आशिक़ों को ख़ुद-कुशी अच्छी लगेगी शहर की राहों में कुछ दिन भीड़ बनके गर चलो तुम बा'द उस के गाँव की ये धूप भी अच्छी लगेगी आइना-गर जो बता दे सच कि आईना है शब-रंग ज़ुल्मत-ए-शब की भी 'अंचल' तीरगी अच्छी लगेगी — Anchal Maurya
उसे हम से शिकायत है करें क्या हमें उस की ज़रूरत है करें क्या नज़र हटती नहीं चेहरे से उस के वो इतनी ख़ूब-सूरत है करें क्या करें हम जितनी भी ता'रीफ़ कम है वो चलती फिरती आफ़त है करें क्या उसे क़िस्तों में हम जो करते हैं याद हमें इतनी ही फ़ुर्सत है करें क्या जो हम चाहें हमें मिलता नहीं वो अब अपनी ऐसी क़िस्मत है करें क्या बदलते रंग हैं गिरगिट सनम के बदलना इन की फ़ितरत है करें क्या मसलकर ज़ख़्म को करती है नासूर ये दुनिया की हक़ीक़त है करें क्या परिंदों ने बनाए ही नहीं घर उन्हें तूफाँ से वहशत है करें क्या ख़ता इस में नहीं 'अंचल' किसी की वो लड़की ही मुसीबत है करें क्या — Anchal Maurya
कोई शिकवा न शिकायत न गिला करते हैं हम तो मुद्दत हुई ख़ामोश रहा करते हैं हम को आता है ज़माने से निपटना लेकिन हम बड़े ज़ब्त से होंठों को सिया करते हैं ऐन मुमकिन है सुनी जाए हमारी इस बार आइए हाथ उठाते हैं दुआ करते हैं उन सेे कह दो कि वो अब बाम पे आया न करें कितने लोगों को वो बर्बाद किया करते हैं हम तो बरसों से कहीं भी नहीं आते-जाते बे-इरादा तिरी गलियों में फिरा करते हैं कैसा बस्ती पे मेरी अब के अज़ाब आया है दिन दहाड़े यहाँ तूफ़ान उठा करते हैं अपने हुज़रे में पड़ा रहता है चुप-चाप 'अंचल' लोग आवाज़ पे आवाज़ दिया करते हैं — Anchal Maurya