कभी मैं तो कभी रक़ीब कोई
उस ने रक्खा था यूँ क़रीब कोई
प्यार से मारा जाएगा साहिब
उस की बाहों में बद-नसीब कोई
बिक गई एक एक रोटी दोस्त
भूक से मर गया ग़रीब कोई
या ख़ुदा तुझ से इल्तिजा है मेरी
वस्ल हो हो मेरे क़रीब कोई
चाहता तो नहीं मगर 'अंचल'
तोड़े उस का भी दिल रक़ीब कोई
— Anchal Maurya















