कहूँ क्या हाल तेरी बे-वफ़ाई कातनिक भी ग़म नहीं मुझ से ज़ुदाई कादिया था माँ ने जो तुझ को बहू कह करकहाँ है यार वो कंगन कलाई का— Anchal Maurya