हाथों को जब तू ने रचाया होगा मेहँदी से
फिर टूटा तेरा भी सपना होगा मेहँदी से
सखियों के संग बैठ जब उन दोनों हाथों में
अपने पिया का नाम लिखाया होगा मेहँदी से
मेरी याद तुझे भी आई होगी जब सबने
तुझ को पिया का प्यार बताया होगा मेहँदी से
दिल चाहेगा कुछ बातें कर मन हल्का कर लूँ
मगर हथेली पर यूँ साया होगा मेहँदी से
पत्थर होंगी आँखें फिर न बहेंगे ये आँसू
कोई अपना ज्यूँ ही पराया होगा मेहँदी से
— Anchal Maurya















