Meaning of

कवाफ़ी

kawaafi • قوافی

तुक; छंद

rhymes; poetic meters

قوافی; شعری اوزان

Arabic

दोस्तों क्या हुआ गर नहीं है कोई इश्क़ का क़ाफ़िया
है नहीं इश्क़ बस प्यार है तुम से, जिस के क़वाफ़ी हैं सौ

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अधूरे ज़ीस्त के मिसरे ग़ज़ल कोई अधूरी सी
क़वाफ़ी से बदलते तुम मेरी फ़ितरत रदीफ़ों सी

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रोज़ ही कवाफ़ी से लड़ती हैं मेरी ग़ज़लें
दूर से तमाशा ये अब रदीफ़ें देखेंगी

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नहीं है इश्क़ तुम से बस मुहब्बत है
न ही कोई शिकायत और अदावत है

तुझे गर बे-वफ़ा बनना है तो बन जा
मोहब्बत का क़वाफ़ी भी निहायत है

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दोस्तों क्या हुआ गर नहीं है कोई इश्क़ का क़ाफ़िया
है नहीं इश्क़ बस प्यार है तुम से, जिस के क़वाफ़ी हैं सौ

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अधूरे ज़ीस्त के मिसरे ग़ज़ल कोई अधूरी सी
क़वाफ़ी से बदलते तुम मेरी फ़ितरत रदीफ़ों सी

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'कवाफ़ी' शब्द उन तुकों को संदर्भित करता है जो कविता में सामंजस्य और लय पैदा करते हैं। यह वह संगीतात्मक गुण है जो छंदों को एक साथ बांधता है, काव्यात्मक अभिव्यक्ति में गहराई और प्रतिध्वनि जोड़ता है।

कवि अपने कार्य की संगीतात्मकता को बढ़ाने के लिए 'कवाफ़ी' का उपयोग करते हैं। यह एकता और प्रवाह की भावना पैदा करने के लिए उपयोग किया जाता है, अक्सर भावनाओं और शब्दों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है।

कविता में, 'कवाफ़ी' वे धागे हैं जो गीतात्मक सुंदरता के ताने-बाने को बुनते हैं।