Meaning of

खनखन

khankhan • کھنکھن

खनक; झंकार

jingling; tinkling

کھنک; جھنکار

Unknown

कभी मैं शे'र कहता हूँ कभी गज़लें बनाता हूँ
सुख़न-वर मैं हूँ मुफ़लिस सो उसे ऐसे मनाता हूँ

हूँ घर के हाल से वाक़िफ सो रोटी को नहीं कहता
मगर जब हद से बाहर हो तो बर्तन खनखनाता हूँ

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मैं ने जैसी चाही थी ना वैसी इन
में खनखन नइँ
जितने प्यारे हाथ हैं तेरे उतने प्यारे कंगन नइँ

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तेरी मुस्कान से ये जेब ऐसे खनखनाते हैं
रईसों की तरह ही देखिए हम मुस्कुराते हैं

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कभी मैं शे'र कहता हूँ कभी गज़लें बनाता हूँ
सुख़न-वर मैं हूँ मुफ़लिस सो उसे ऐसे मनाता हूँ

हूँ घर के हाल से वाक़िफ सो रोटी को नहीं कहता
मगर जब हद से बाहर हो तो बर्तन खनखनाता हूँ

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मैं ने जैसी चाही थी ना वैसी इन
में खनखन नइँ
जितने प्यारे हाथ हैं तेरे उतने प्यारे कंगन नइँ

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खनखन की ध्वनि एक नाजुक और जीवंत माहौल का आभास कराती है, जैसे पायल या चूड़ियों की गति में खनक। कविता में, यह जीवन की हलचल और सूक्ष्म संगीत का प्रतीक है, जो अक्सर आनंद और उत्सव का संकेत देता है।

कवि अक्सर 'खनखन' का उपयोग प्रिय के गहनों से सजी छवि को उभारने के लिए करते हैं। यह किसी प्रिय व्यक्ति की उपस्थिति, उनके आगमन का संगीत, या उनकी हँसी की गूंज का प्रतीक हो सकता है।

'खनखन' की मृदु झंकार में, जीवन के सूक्ष्म आनंद की कविता मिलती है।