Meaning of

ख़ुदग़रज़

khudgharz • خود غرض

स्वार्थी; आत्मकेंद्रित

selfish; self-centered

خود غرض; خود مرکز

Persian

उम्मीद है ये दिल लगेगा एक दिन
बंजर ज़मीं पे इश्क़ बोता है कोई

ख़ुद-ग़र्ज़ दुनियाँ में बड़ा दुख होता है
जब साहिब-ए-दिल तुझ सेा खोता है कोई

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मुझ को न दिल पसंद न वो बे-वफ़ा पसंद
दोनों हैं ख़ुद-ग़रज़ मुझे दोनों हैं ना-पसंद

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नफ़रत धोका बुग़्ज़ तअ'स्सुब झूट दिखावा ख़ुद-ग़रज़ी
कैसे कैसे ज़हर भरे हैं इंसाँ की शिरयानों में

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ख़ुद-ग़रज़ दुनिया की तस्वीरों को आँखों में छुपाकर
क्या कहें ज़िंदा है अब तक भी वफ़ा दिल में हमारे

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मैं ज़ीस्त में अपनी कभी ख़ुद ग़र्ज तो होता नहीं
जो चाहिए दुनिया को मैं जो मर्द वो होता नहीं

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नक़ली आँसू झूठी क़स्में सब पर्दे हैं नज़ाकत के
बस बाज़ार लगे हैं जज़्बों के सौदे हैं शराफ़त के

ख़ुद-ग़रज़ी के हैं अल्फ़ाज़ मोहब्बत के अफ़साने में
फिर भी लाते हैं चेहरे पर झूठे रंग इनायत के

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हम चाहते हैं जिन को वो पास नहीं रहते
दाइम किसी की ख़ातिर हम ख़ास नहीं रहते

अब लोग बदलने में याँ वक़्त लगाते नइँ
ख़ुद-ग़र्ज़ ज़माने में इख़्लास नहीं रहते

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उम्मीद है ये दिल लगेगा एक दिन
बंजर ज़मीं पे इश्क़ बोता है कोई

ख़ुद-ग़र्ज़ दुनियाँ में बड़ा दुख होता है
जब साहिब-ए-दिल तुझ सेा खोता है कोई

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मुझ को न दिल पसंद न वो बे-वफ़ा पसंद
दोनों हैं ख़ुद-ग़रज़ मुझे दोनों हैं ना-पसंद

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मूल रूप से, 'ख़ुदग़रज़' का अर्थ है वह व्यक्ति जो अपने हितों को दूसरों से ऊपर रखता है। कविता में, यह शब्द अक्सर मानव स्वभाव के गहरे पहलुओं की खोज करता है, स्वार्थ से उत्पन्न होने वाले अलगाव और खालीपन पर विचार करता है।

कवि 'ख़ुदग़रज़' का उपयोग विश्वासघात और अकेलेपन के विषयों में गहराई से जाने के लिए करते हैं। यह आत्मा की गहरी इच्छाओं का दर्पण बनता है। यह शब्द दया या तिरस्कार की भावना को जागृत कर सकता है, संदर्भ के आधार पर।

कविता के क्षेत्र में, 'ख़ुदग़रज़' हमें अपनी छायाओं का सामना करने की चुनौती देता है। यह मानव स्थिति की जटिलता की याद दिलाता है।