Meaning of

ख़ुमार

khumaar • خمار

मदहोशी; नशा

intoxication; trance

خمار; نشہ

Arabic

चल दिया पलट के मैं घर ख़ुमार बाक़ी है
कुछ सुधार है मुझ
में कुछ सुधार बाक़ी है

साथ जो मेरे था, मैं क़र्ज़-दार सबका हूँ
शुक्र है ख़ुदा मुझ पे इक उधार बाक़ी है

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ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ
तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ

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बख़्शी हैं हम को इश्क़ ने वो जुरअतें 'मजाज़'
डरते नहीं सियासत-ए-अहल-ए-जहाँ से हम

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सच तो ये है 'मजाज़' की दुनिया
हुस्न और इश्क़ के सिवा क्या है

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तेशे बग़ैर मर न सका कोहकन 'असद'
सरगश्ता-ए-ख़ुमार-ए-रुसूम-ओ-क़ुयूद था

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ख़ुमारी इस क़दर तेरी दिमाग़-ओ-दिल पे तारी है
कि तेरे नाम के हर नाम को रिक्वेस्ट भेजी है

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तड़पते रहे क़ब्र में लोग सारे
जिन्हें बंदगी की ख़ुमारी नहीं थी

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ऐसे भी लोग हैं यहाँ जो अपने नाम से
महफ़िल में पढ़ के आ गए मक़्ता मजाज़ का

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शराबों से ख़ुमारी आ रही है
नशा तेरा उतरता जा रहा है

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इश्क़ में कैसे ये जान वारी गई
फिर मिरे सर से कैसे खु़मारी गई

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चल दिया पलट के मैं घर ख़ुमार बाक़ी है
कुछ सुधार है मुझ
में कुछ सुधार बाक़ी है

साथ जो मेरे था, मैं क़र्ज़-दार सबका हूँ
शुक्र है ख़ुदा मुझ पे इक उधार बाक़ी है

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ये कैसा नश्शा है मैं किस अजब ख़ुमार में हूँ
तू आ के जा भी चुका है मैं इंतिज़ार में हूँ

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'ख़ुमार' शब्द एक आनंदमय मदहोशी की स्थिति का संकेत देता है, जहाँ वास्तविकता एक स्वप्निल धुंध में बदल जाती है। कविता में, यह अक्सर प्रेम के मोहक आकर्षण या सौंदर्य के मंत्रमुग्ध कर देने वाले प्रभाव का प्रतीक होता है।

कवि 'ख़ुमार' का प्रयोग प्रेम के नशीले प्रभाव, जुनून के मीठे समर्पण, या सौंदर्य से उत्पन्न स्वप्निल अवस्था को जगाने के लिए करते हैं। यह अक्सर वास्तविकता की कठोरता के विपरीत होता है।

कविता की दुनिया में, 'ख़ुमार' सपनों की कोमल बाहों का आलिंगन है। यह मोह में खोए हृदय की मृदु फुसफुसाहट है।