Meaning of
किब्र
kibr • کبر
Hindi
गर्व; अहंकार
English
pride; arrogance
Urdu
غرور; تکبر
Origin
Arabic
Ash'aar
Nuance
'किब्र' अपने मूल अर्थ में आत्म-महत्व या श्रेष्ठता की भावना को दर्शाता है। कविता में अक्सर इस गर्व की विनाशकारी प्रकृति को दर्शाया जाता है, यह दिखाते हुए कि कैसे यह व्यक्ति को अलग-थलग कर देता है और उसके चारों ओर की सुंदरता को देखने से अंधा कर देता है।
Poetic Usage
कवि अक्सर 'किब्र' का उपयोग उन पात्रों के पतन को दर्शाने के लिए करते हैं जो अपने अहंकार में डूबे होते हैं। यह विनम्रता के विपरीत है और अत्यधिक गर्व के खतरों के खिलाफ चेतावनी के रूप में कार्य करता है।
Closing Insight
कविता में, 'किब्र' गर्व के आंतरिक उथल-पुथल को दर्शाने वाले दर्पण के रूप में कार्य करता है। यह आत्म-मूल्य और विनम्रता के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाता है।
