Meaning of

कुशाद

kushaad • کشاد

विस्तार; खुलापन; उदारता

expansion; openness; generosity

وسعت; کشادگی; سخاوت

Persian

कुशादा जितनी उतनी ही बड़ी चालक है दुनिया
ज़रा सी ठोकरें खा लो अकेला छोड़ देती है

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ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

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ऐ मेरे हम सफ़र तू भूल गया
साथ चलने का वो जो वा'दा था

ये तेरे इश्क़ में सिमटता गया
दिल वगरना मेरा कुशादा था

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ज़िया को पास से देखा बहुतों से कुशादा है
हमारी चीख से दीवार रोए, अब क्या बोलें

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बे-वफ़ाई से तिरी सीखा ये मैं ने भी
हस्ती हस्ती सी कुशादा आँखों से रोना

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दिल कुशादा है अब भी उन की ही ख़ातिर
दिल  पे गुज़री कोई क़यामत नहीं है

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नसीब अपना खुला नहीं है
जो चाहिए था मिला नहीं है

उसी पे अटका है फिर से जा कर
कुशादा दिल है भरा नहीं है

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सिमट कर रख लिया है याद को तुम ने सही में
सही में शान को अपने कुशादा कर लिया क्या?

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कुशादा जितनी उतनी ही बड़ी चालक है दुनिया
ज़रा सी ठोकरें खा लो अकेला छोड़ देती है

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ज़मीं को तर-ब-तर करने किसी दिन आएगा बादल
न जाने किन ग़रीबों के घरों को खाएगा बादल

सितारे नोच लाऊँगा किसी दिन ज़िद पे आया तो
अभी ग़र्दिश में हूँ यारों बहुत इतराएगा बादल

ये सारी मछलियाँ जब बद-दुआ देने लगेंगी तब
समुंदर प्यास से तड़पेगा और मर जाएगा बादल

कहीं पर कम कहीं ज़्यादा ये कैसा फ़ैसला तेरा
सॅंभल जा वक़्त है वरना बहुत पछताएगा बादल

मुनाफ़िक़ है ये रातों का किसी को भी नहीं बख़्शा
जवानी ज़ुल्फ़ आँखें और क्या-क्या खाएगा बादल

हमीं हैं जो तुझे सर पे चढ़ाकर फिरते रहते हैं
कुशादा ज़र्फ़ कर लें हम तो क्या टिक पाएगा बादल

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अपने मूल अर्थ में, 'कुशाद' का मतलब एक भौतिक या रूपकात्मक खुलापन है, एक विस्तार जो प्रकाश और हवा को स्वतंत्र रूप से बहने देता है। कविता में, यह शब्द अक्सर मुक्ति और उदारता की भावना को उजागर करता है, एक ऐसा दिल या दिमाग जो नए अनुभवों और भावनाओं के लिए खुला है।

'कुशाद' का उपयोग कवि एक खुले दिल या दिमाग के विचार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह अक्सर बंदिश या प्रतिबंध के विपरीत होता है, स्वतंत्रता और स्वीकृति का प्रतीक होता है। यह एक उदार आत्मा का भी सुझाव दे सकता है, जो दुनिया को गले लगाने के लिए तैयार है।

'कुशाद' खुलेपन और उदारता की भावना को समेटे हुए है, कवियों को मानव भावना की विशालता का अन्वेषण करने के लिए आमंत्रित करता है।