Meaning of

लाफ़

laaf • لاف

शेख़ी; डींग

boast; brag

شیخی; ڈینگ

Persian

कुछ न पाओगे मेरे ख़िलाफ़ इन सुबूतों से तुम
मैं ने जो कुछ कहा है मैं फिर से भी कह सकता हूँ

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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही

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मैं ख़ुद ये चाहता हूँ कि हालात हों ख़राब
मेरे ख़िलाफ़ ज़हर उगलता फिरे कोई

ऐ शख़्स अब तो मुझ को सब कुछ क़ुबूल है
ये भी क़ुबूल है कि तुझे छीन ले कोई

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ख़िलाफ़-ए-शर्त-ए-अना था वो ख़्वाब में भी मिले
मैं नींद नींद को तरसा मगर नहीं सोया

ख़िलाफ़-ए-मौसम-ए-दिल था कि थम गई बारिश
ख़िलाफ़-ए-ग़ुर्बत-ए-ग़म है कि मैं नहीं रोया

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मैं आप अपनी मौत की तय्यारियों में हूँ
मेरे ख़िलाफ़ आप की साज़िश फ़ुज़ूल है

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ये नस्ल-ए-नौ तो हमीं से जवाज़ माँगेगी
सो इख़्तिलाफ़ को हद से सिवा नहीं रखना

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अपने ख़िलाफ़ फ़ैसला ख़ुद ही लिखा है आपने
हाथ भी मल रहे हैं आप आप बहुत अजीब हैं

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गर मानते हैं आप भी मुझ को कसूरवार
मेरे खिलाफ़ आप भी पत्थर उठाइए

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डाल भी करती रही वा'दा ख़िलाफ़ी
पेड़ का पूरा भरोसा ख़ाक कर के

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ये मिरी ग़ज़ल का मिज़ाज है कि वो क़ाफ़िए के ख़िलाफ़ है
कभी रक़्स करती है अक्स पर अभी आईने के ख़िलाफ़ है

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कुछ न पाओगे मेरे ख़िलाफ़ इन सुबूतों से तुम
मैं ने जो कुछ कहा है मैं फिर से भी कह सकता हूँ

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हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही

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'लाफ़' मूल रूप से अपनी उपलब्धियों या गुणों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की भावना को दर्शाता है। कविता में, यह अक्सर मानवीय प्रवृत्ति को दर्शाता है कि कैसे लोग अपनी अहमियत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, कभी हास्यपूर्ण ढंग से, तो कभी आलोचनात्मक रूप से।

'लाफ़' का उपयोग कवि आत्ममुग्धता और आत्म-प्रवंचना के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह सामाजिक मानदंडों की आलोचना करने या गर्व की मूर्खता को उजागर करने का एक साधन हो सकता है।

कविता के क्षेत्र में, 'लाफ़' मानव स्थिति का एक दर्पण है, जहाँ गर्व अक्सर असुरक्षा को छुपाता है।