Meaning of

नाद

naad • ناد

ध्वनि; गूंज; प्रतिध्वनि

sound; resonance; echo

آواز; گونج; بازگشت

Sanskrit

कितने नादाँ हैं तेरे भूलने वाले कि तुझे
याद करने के लिए उम्र पड़ी हो जैसे

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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें
गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी

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दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है

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हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले
कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले

ज़िंदगी भर की मोहब्बत का सिला ले डूबे
कैसे नादाँ थे तिरे जान से जाने वाले

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दिल मेरा चट्टान नहीं है
इतना भी नादान नहीं है

खो कर तुझ को खोने का डर
ये सहना आसान नहीं है

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पहेली ज़िंदगी की कब तू ऐ नादान समझेगा
बहुत दुश्वारियाँ होंगी अगर आसान समझेगा

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वो किसी को याद कर के मुस्कुराया था उधर
और मैं नादान ये समझा कि वो मेरा हुआ

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पूछ मुझ सेे कि तेरे होंठ पे तिल है क्यूँँ कर
ऐसा नुक़्ता कहीं नादान समझते होंगे

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ये नादानी नहीं तो क्या है 'दानिश'
समझना था जिसे समझा रहा हूँ

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कभी उस को हम अपनी रूह का पैकर समझते थे
बहुत नादान थे मक़्तल को अपना घर समझते थे

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कितने नादाँ हैं तेरे भूलने वाले कि तुझे
याद करने के लिए उम्र पड़ी हो जैसे

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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें
गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी

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मूल रूप में 'नाद' ध्वनि का प्रतीक है, एक साधारण श्रवण घटना। परंतु कविता में यह आत्मा की गूंज, भावनाओं की प्रतिध्वनि का रूप ले लेता है, जो हृदय के कक्षों में गूंजती है। यह अदृश्य तरंगों को पकड़ता है, जो चाहत की गहराई से उठती हैं और ब्रह्मांड की मौन फुसफुसाहटों को व्यक्त करती हैं।

'नाद' का उपयोग कवि अक्सर हृदय की मौन पुकार को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह आत्मा में बसे अनकहे इच्छाओं का रूपक बन जाता है। यह मौन के विपरीत है, बाहरी शांति के पीछे छिपे आंतरिक उथल-पुथल को उजागर करता है।

नाद हृदय की गहरी इच्छाओं की प्रतिध्वनि है, भीतर की अदृश्य सिम्फनी की याद दिलाता है।