Meaning of
नंग-ए-मय-परस्ती
nang-e-may-parasti • ننگ مے پرستی
Hindi
मदिरा-पूजा का अपमान
English
shame of wine-worship
Urdu
شراب پرستی کی شرمندگی
Origin
Persian
Nuance
‘नंग-ए-मय-परस्ती’ वाक्यांश मदिरा या नशे में अत्यधिक लिप्तता से जुड़ी अपमान की भावना को व्यक्त करता है। कविता में, यह अक्सर इच्छा और नैतिकता के बीच के आंतरिक संघर्ष को दर्शाता है, जो लिप्तता के बाद की शर्म को उजागर करता है।
Poetic Usage
कवि ‘नंग-ए-मय-परस्ती’ का उपयोग नैतिक संघर्ष और लिप्तता के परिणामों के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह अक्सर पवित्रता और संयम के विषयों के विपरीत होता है।
Closing Insight
‘नंग-ए-मय-परस्ती’ में, कवि प्रलोभन के साथ आत्मा के संघर्ष का दर्पण पाता है।