Meaning of

पैमा

paima • پیمان

माप; पैमाना; वादा

measure; scale; promise

پیمائش; پیمانہ; وعدہ

Persian

नित्य सागर तड़पने लगा प्यास से
अश्क पैमानों में जब पिघल कर गया

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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया
किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था

एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे
एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था

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अब तो उतनी भी मुयस्सर नहीं मय-ख़ाने में
जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में

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अलग बैठे थे फिर भी आँख साक़ी की पड़ी हम पर
अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आएँगे

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आता है जी में साक़ी-ए-मह-वश पे बार बार
लब चूम लूँ तिरा लब-ए-पैमाना छोड़ कर

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फ़रेब-ए-साक़ी-ए-महफ़िल न पूछिए 'मजरूह'
शराब एक है बदले हुए हैं पैमाने

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मुझे ये फ़िक्र सब की प्यास अपनी प्यास है साक़ी
तुझे ये ज़िद कि ख़ाली है मिरा पैमाना बरसों से

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मोहब्बत वहीं तक है सच्ची मोहब्बत
जहाँ तक कोई अहद-ओ-पैमाँ नहीं है

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मैं भटकता ही रहा दश्त-ए-शनासाई में
कोई उतरा ही नहीं रूह की गहराई में

क्या मिलाया है बता जाम-ए-पज़ीराई में
ख़ूब नश्शा है तेरी हौसला-अफ़जाई में

तेरी यादों की सुई, प्रेम का धागा मेरा
काम आए हैं बहुत ज़ख़्मों की तुरपाई में

डस रही है ये सियह-रात की नागिन मुझ को
भर रही ज़हर-ए-ख़मोशी, रग-ए-तन्हाई में

सुर्मा-ए-मक्र-ओ-फ़रेब आँखों में जब से है लगा
तब से है ख़ूब इज़ाफ़ा हद-ए-बीनाई में

फ़िक्र-ओ-फ़न, रंग-ए-तग़ज़्ज़ुल, न ग़ज़ल की ख़ुशबू
बस लगा रहता हूँ मैं क़ाफ़िया-पैमाई में

सीख पानी से हुनर काम 'अनीस' आएगा
दौड़ कर ख़ुद ही चला आता है गहराई में

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गर चाहत का कोई पैमाना होता
मैं ने तेरी चाहत को मापा होता

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नित्य सागर तड़पने लगा प्यास से
अश्क पैमानों में जब पिघल कर गया

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तू भी कब मेरे मुताबिक मुझे दुख दे पाया
किस ने भरना था ये पैमाना अगर ख़ाली था

एक दुख ये कि तू मिलने नहीं आया मुझ सेे
एक दुख ये है उस दिन मेरा घर ख़ाली था

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अपने मूल अर्थ में, 'पैमा' मापने की क्रिया या मापदंड को दर्शाता है। कविता में, यह वादों और प्रतिबद्धताओं के विचार तक विस्तारित होता है, अक्सर शब्दों के वजन और किसी के इरादों की गहराई का प्रतीक होता है।

'पैमा' का उपयोग कवि वादों की गंभीरता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह शब्दों की बाध्यकारी प्रकृति का प्रतीक हो सकता है। अक्सर क्षणिक शब्दों के विपरीत, यह सच्चे वादों के स्थायी प्रभाव को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'पैमा' वादों की स्थायी शक्ति और शब्दों के गहरे वजन का प्रमाण है।