Meaning of

पेचो-ख़म

pecho-kham • پیچ و خم

घुमाव; जटिलताएँ

twists and turns; complexities

پیچیدگیاں; موڑ

Persian

कभी तो चाहिए इस जिस्म-ए-ज़िंदाँ से रिहाई भी
कभी तो चाहिए अपनों से दिल को आशनाई भी

मेरी मंज़िल तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म से आगे है
मेरे ज़िम्में है घर वालों की रोटी भी दवाई भी

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ज़िंदगी में कोई भी हमदम नहीं है
शुक्र है ये रब का पेचो-ख़म नहीं है

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सुख़न अब तक तिरी ज़ुल्फ़ों के पेचओख़म में उलझा है
हमें जब इश्क़ होगा तो बयाँ अश'आर कर देंगे

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तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म में उलझे हैं वरना
इक दिन हम भी फ़लक पर होते बनके कोई सितारा

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कभी तो चाहिए इस जिस्म-ए-ज़िंदाँ से रिहाई भी
कभी तो चाहिए अपनों से दिल को आशनाई भी

मेरी मंज़िल तेरी ज़ुल्फ़ों के पेच-ओ-ख़म से आगे है
मेरे ज़िम्में है घर वालों की रोटी भी दवाई भी

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ज़िंदगी में कोई भी हमदम नहीं है
शुक्र है ये रब का पेचो-ख़म नहीं है

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यह शब्द जीवन के जटिल रास्तों का आभास कराता है, जहाँ अप्रत्याशित मोड़ और गहराइयाँ होती हैं। कविता में, यह भावनाओं और संबंधों की जटिलता का प्रतीक है, जहाँ स्पष्टता दुर्लभ होती है और यात्रा का महत्व उतना ही होता है जितना कि मंज़िल का।

कवि इसे प्रेम और भाग्य की भूलभुलैया जैसी प्रकृति को वर्णित करने के लिए उपयोग करते हैं। यह भाग्य के घुमावदार रास्तों या दिल की उलझी भावनाओं का संकेत दे सकता है। अक्सर सरलता के विपरीत, यह जटिलता में पाई जाने वाली सुंदरता को उजागर करता है।

काव्यिक क्षेत्र में, 'पेचो-ख़म' हमें जीवन की अनिश्चितताओं के जटिल नृत्य को अपनाने के लिए आमंत्रित करता है।