Meaning of

रेशा

resha • ریشہ

रेशा; धागा; तंतु

fiber; thread; strand

ریشہ; دھاگہ; تار

Persian

चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी
सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी

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नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं
जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं

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परेशाँ है वो झूटा इश्क़ कर के
वफ़ा करने की नौबत आ गई है

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नींद उस की है दिमाग़ उस का है रातें उस की हैं
तेरी ज़ुल्फ़ें जिस के बाज़ू पर परेशाँ हो गईं

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अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को
मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं

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ये किस तरह का शोर है पिछले मकान में
इस वक़्त आधी रात परेशान कौन है

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चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है

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जब भी तिरी क़ुर्बत के कुछ इम्काँ नज़र आए
हम ख़ुश हुए इतने कि परेशाँ नज़र आए

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जीना मुश्किल है के आसान, ज़रा देख तो लो
लोग लगते हैं परेशान, ज़रा देख तो लो

इन चराग़ों के तले ऐसे अँधेरे क्यूँँ हैं?
तुम भी रह जाओगे हैरान, ज़रा देख तो लो

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आती है परेशानी तो आता है ख़ुदा याद
वर्ना नहीं दुनिया में कोई तेरे सिवा याद

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चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी
सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी

28

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नज़र आए न तू जिन को परेशानी से मरते हैं
जो तुझ को देख लेते हैं वो हैरानी से मरते हैं

82

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'रेशा' का मूल अर्थ उन नाज़ुक धागों से है जो जीवन के ताने-बाने को बुनते हैं। कविता में, यह अक्सर उन जटिल संबंधों और नाज़ुक बंधनों का प्रतीक होता है जो जीवन को एक साथ बांधे रखते हैं।

'रेशा' का उपयोग कवि मानव संबंधों की नाज़ुकता को व्यक्त करने के लिए करते हैं। यह भावनाओं के नाज़ुक संतुलन या प्रेम और हानि के बीच की महीन रेखा का प्रतिनिधित्व कर सकता है।

कविता की दुनिया में, 'रेशा' हमें उन नाज़ुक धागों की याद दिलाता है जो हमारे जीवन को बांधते हैं, हमें उन्हें संजोने के लिए प्रेरित करते हैं।