Meaning of

रोग़

rog • روغ

बीमारी; रोग; व्याधि

disease; ailment; affliction

بیماری; مرض; عارضہ

Sanskrit

जानती हो कि क्या हुआ है तुम्हें
इश्क़ का रोग लग गया है तुम्हें

तुम को देखें तो देखते जाएँ
देखने का अलग मज़ा है तुम्हें

36

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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था
तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे

ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया
मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

129

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वो दुल्हन बन के रुख़्सत हो गई है
कहाँ तक कार का पीछा करोगे?

117

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क्या कहूँ तुम से मैं कि क्या है इश्क़
जान का रोग है बला है इश्क़

79

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तुम नहीं उतरोगी मैं उतरूँगा गहराई में
पगड़ी बड़ी होती है दुपट्टे से लंबाई में

63

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मैं अपने लिए हद से बुरा सोच चुका हूँ
तुम जो भी करोगे मुझे वो कम ही लगेगा

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मिले तो कुछ बात भी करोगे
कि बस उसे देखते रहोगे

59

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बहुत आसान है कहना, बुरा क्या है भला क्या है
करोगे इश्क़ तब मालूम होगा, मसअला क्या है

46

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अब कह रहे हो मेरी ज़रूरत नहीं तुम्हें
फिर क्या करोगे मेरी ज़रूरत अगर पड़ी

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सीरत ले कर बैठे हो तुम,
सूरत वालों से हारोगे,

सौ सीरत की इक सूरत की,
गर जाँ भी अपनी वारोगे

40

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जानती हो कि क्या हुआ है तुम्हें
इश्क़ का रोग लग गया है तुम्हें

तुम को देखें तो देखते जाएँ
देखने का अलग मज़ा है तुम्हें

36

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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था
तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे

ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया
मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे

129

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मूल रूप से 'रोग' का अर्थ है एक शारीरिक या मानसिक स्थिति जो असुविधा या पीड़ा का कारण बनती है। कविता में, यह शब्द अक्सर अपने शाब्दिक अर्थ से परे जाकर गहरी भावनात्मक या अस्तित्वगत पीड़ा को व्यक्त करता है, जो मानव स्थिति की नाजुकता को पकड़ता है।

'रोग' का उपयोग कवि प्रेम की यातना, आत्मा की अशांति, और जीवन के अपरिहार्य क्षय के विषयों की खोज के लिए करते हैं। यह स्वास्थ्य और जीवन शक्ति के शब्दों के विपरीत है, जो अस्तित्व की नाजुकता को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'रोग' आत्मा की छिपी हुई बीमारियों को प्रतिबिंबित करने वाला दर्पण बन जाता है। यह हमें स्वास्थ्य और पीड़ा के बीच के नाजुक संतुलन की याद दिलाता है।