Meaning of

रूस्वा

roosva • رسوا

बदनाम; अपमानित

disgraced; humiliated

بدنام; ذلیل

Persian

फिर किसी अजनबी पर भरोसा करूँँ
दिल लगा कर मैं ग़लती दुबारा करूँँ

ज़ख़्म पिछली मुहब्बत के जो भी मिले
क्या मैं उस ज़ख़्म को यूँँ ही रुसवा करूँँ

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क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत
प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ

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यूँँ तो रुस्वाई ज़हर है लेकिन
इश्क़ में जान इसी से पड़ती है

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कैसे कह दूँ कि मुझे छोड़ दिया है उस ने
बात तो सच है मगर बात है रुस्वाई की

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तुझ को सोचा तो पता हो गया रुसवाई को
मैं ने महफूज़ समझ रखा था तन्हाई को

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शिकस्ता दिल शब-ए-ग़म दर्द रुसवाई
अरे इतना तो चलता है मुहब्बत में

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अपनी रुस्वाई तिरे नाम का चर्चा देखूँ
इक ज़रा शे'र कहूँ और मैं क्या क्या देखूँ

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इश्क़ जब तक न कर चुके रुस्वा
आदमी काम का नहीं होता

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शौक़ के हाथों ऐ दिल-ए-मुज़्तर क्या होना है क्या होगा
इश्क़ तो रुस्वा हो ही चुका है हुस्न भी क्या रुस्वा होगा

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इश्क़ हमारी बर्बादी को दिल से दुआएँ देता है
हम सेे पहले इतना रौशन नाम न था रुस्वाई का

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फिर किसी अजनबी पर भरोसा करूँँ
दिल लगा कर मैं ग़लती दुबारा करूँँ

ज़ख़्म पिछली मुहब्बत के जो भी मिले
क्या मैं उस ज़ख़्म को यूँँ ही रुसवा करूँँ

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क्यूँ लिखूँ ज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सार पे नग़्में बहुत
प्यार की पहली नज़र रुस्वाइयाँ ही क्यूँ लिखूँ

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'रूस्वा' शब्द सामाजिक और व्यक्तिगत पतन का भार वहन करता है। अपने मूल अर्थ में, यह सम्मान या प्रतिष्ठा की हानि को दर्शाता है, अक्सर सार्वजनिक दृष्टि में। कविता ने इस शब्द को विश्वासघात, शर्म और प्रतिष्ठा की नाजुकता के विषयों को खोजने के लिए अपनाया है।

कविता में 'रूस्वा' का उपयोग अक्सर प्रतिष्ठा से पतन को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह एक बार सम्मानित व्यक्ति की छवि को उभार सकता है, जिसे अब समाज द्वारा तिरस्कृत किया गया है। यह शब्द 'इज़्ज़त' (सम्मान) के विपरीत है, सामाजिक स्थिति की अस्थिरता को उजागर करता है।

कविता के क्षेत्र में, 'रूस्वा' सम्मान और अपमान के बीच नाजुक संतुलन की एक मार्मिक याद दिलाता है।