Meaning of

साहब-ए-किरदार

saahib-e-kirdaar • اڑا

चरित्रवान व्यक्ति; ईमानदारी

person of character; integrity

کردار والا شخص; دیانتداری

Persian

तुम्हें पता है जिन्हें तुम ख़ुदा समझते हो
तुम्हारे सोचने और बोलने से डरते हैं

43

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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है

283

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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है
ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है

ये राह-ए-इश्क़ है इस
में क़दम ऐसे ही उठते हैं
मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है

221

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बहुत मज़ाक़ उड़ाते हो तुम ग़रीबों का
मदद तो करते हो तस्वीर खींच लेते हो

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वाक़िफ़ कहाँ ज़माना हमारी उड़ान से
वो और थे जो हार गए आसमान से

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चुप रहते हैं चुप रहने दो राज़ बताओ खोले क्या
बात वफ़ा की तुम करती हो बोलो हम कुछ बोले क्या

उल्फ़त तो अफ़साना है तुम करती खूब सियासत हो
हम भी हैं मक़बूल बहुत अब बोल किसी के होलें क्या

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कहाँ तो ख़ाक उड़ाता था मुस्कुराता था
मुझ ऐसे शख़्स को भी क्या से क्या बनाया गया

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सदाएँ देते हुए और ख़ाक उड़ाते हुए
मैं अपने आप से गुज़रा हूँ तुझ तक आते हुए

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परिंद शाख़ पे तन्हा उदास बैठा है
उड़ान भूल गया मुद्दतों की बंदिश में

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तुम सोच रहे हो बस, बादल की उड़ानों तक
मेरी तो निगाहें हैं सूरज के ठिकानों तक

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तुम्हें पता है जिन्हें तुम ख़ुदा समझते हो
तुम्हारे सोचने और बोलने से डरते हैं

43

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परों को खोल ज़माना उड़ान देखता है
ज़मीं पे बैठ के क्या आसमान देखता है

283

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'साहब-ए-किरदार' उस व्यक्ति को संदर्भित करता है जो मजबूत नैतिक सिद्धांतों और ईमानदारी का धनी होता है। कविता में, यह अक्सर आदर्श मानव का प्रतीक होता है, जो अपने विश्वासों और मूल्यों में दृढ़ रहता है।

कवि 'साहब-ए-किरदार' का उपयोग दृढ़ता और नैतिक शक्ति के गुणों को उजागर करने के लिए करते हैं। यह अक्सर उन पात्रों के विपरीत होता है जिनमें ईमानदारी की कमी होती है, सच्चे चरित्र की महानता को उजागर करता है।

'साहब-ए-किरदार' ईमानदारी का एक प्रकाशस्तंभ है, चरित्र की शक्ति को एक काव्यात्मक श्रद्धांजलि।